पहचान विरूद्ध पुरूषार्थ परिणाम जीवन से घात
आचरण अनुभूति से बौखलाई आशा अकांक्षा बगाबत को तैयार आधार विहीन ब्यान व्याख्यानो से बिबिलाया आत्म सम्मान पहचान परिणाम आचरण व्यवहार पर उठे सबाल मानवता , मानव धर्म सृजन में श्रेष्ठ आस्था विश्वास व्ही.एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. कहते है जब जब सृजन में पहचान विरूद्ध पुरूषार्थ और परिणाम रहै है तब तब समृद्ध , खुशहाॅल के मार्ग के साथ उसे घात ही कहा गया है । क्योकि अनादिकाॅल से मानवता , मानवधर्म ही सृजन में श्रेष्ठ आस्था विश्वास का केन्द्र रहा है । क्योकि पहचान विरूद्ध आचरण व्यवहार कभी श्रेष्ठ सिद्ध नही हो सकता ऐसी मान्यता भी किसी भी सभ्य समाज में रही है । क्योकि जिस तरह से आधार विहीन ब्यान व्याख्यान सर्बकल्याण के नाम सत्ता तक पहुॅचने के अचूक शस्त्र सिद्ध हो रहै है वह किसी से छिपा नही मगर जिस आचरण व्यवहार से आज जिस तरह से आत्मसंमान बिलबिलाया है वह बड़ा ही घातक खबर यह है कि आचरण व्यवहार से बौखलाई श्रेष्ठ आशा आकांक्षाये अब बगाबत की ओर बढ़ रही है । सबाल की आढ़ में अदृश्य भावनाये आज भले ही शांत नजर आती हो मगर इतिहास अनुभव कभी गलत नही होते । ये सह...