खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

  

श्रेष्ठ समझ संस्कारो के अभाव मे सृजन का बंटाढार 

 जीवन आधार से द्रोह संगीन अपराध 

व्ही. एस. भल्ले 


26 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार म.प्र. 

मौजूद जीवन संघर्ष का बास्ता कोई जो भी दे मगर खण्ड खण्ड असतित्व के सहारे जो अखण्ड आधार की कोसिश समय काल खण्डो मे जब जब होती रही वह श्रेष्ठ समझ संस्कारो के अभाव मे मानव जीवन को सिर्फ कलंकित ही नही बल्कि सृजन का बंटाढार भी करती रही है आज भी जिस तरह से समृद्ध जीवन के नाम अध्यात्म और जीवन आधार से द्रोह अतिज्ञान या अज्ञानता के कारण चल रहा है वह मानव जीवन के लिये पूर्व वत संगीन अपराध सिद्ध हो इसमे किसी संदेह नही होना चाहिए । जीवन मे सब कुछ साक्षी , दिग्दर्शित होने के बाबजूद जीवन द्रोह कितना सार्थक सिद्ध होगा यह तो समय ही सिद्ध करेगा मगर समृद्ध सिद्ध जीवन और मूल आधार का फाॅरमूला इसी तरह परवान चढ़ता रहा अभी तो शिरूआत है आगे जीवन का सफर कैसा रहने बाला है इससे हर समझ बाला अच्छी तरह विदित है । सत्ता सामथ्र्य के लिये गैग गिरोह बन्द आधार खण्ड खण्ड आस्थाओ के बीच कितना सिद्ध रहने बाला है अगर जीवन का संघर्ष एक अखण्ड आधार का है तो फिर प्रयास भी मूल आधार के अनुकूल होना चाहिए मानव जीवन श्रेष्ठ अस्त्र उसका कर्म अगर दिशाहीन हुआ तो कैसै मानव धर्म की रक्षा होगी । जीवन सृजन को आयना दिखाने बालो को शायद यह भान नही कि जिस पर आज उसे गर्व गौरव है वह तो बैसै भी नाशवान हेै उसका अन्त सुनिश्चित है । तो फिर जीवन के मूल से द्रोह कैसा कहते आधार मजबूत नही तो मजबूत ईमारत का खड़ा रह पाना असंभव ही नही नमुमकिन है जो सत्य है मगर फिर भी सामथ्र्यशाली समय काल परिस्थिति अनुसार आज तक करते आये है आज भी कर रहै है जो न तो मानव जीवन के हित मे है न ही जीव जगत हित मे अगर मानव को जीवन मे अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करनी है तो उसे स्वयं के जीवन के साथ शेष जीवनो के साथ न्याय का भाव रखना होगा जिस तरह जीवन असतित्व मे आने के धीरे धीरे पूर्ण असतित्व प्राप्त कर अन्त प्राप्त करता लगभग यही स्थति लगभग हर क्षैत्र ही है जो आम जीवन को नही भूलना चाहिए । संसाधन सौपान अच्छे संस्कारो के मोहताज होते है और प्रतिभा संरक्षण मानव धर्म मगर कहते जब तक सामथ्र्य पुरूषार्थ की श्रेष्ठता का आधार सृजन मे योगदान और साधन उत्तम नही होगे तब तक खण्ड खण्ड असतित्व किसी गिटटी का ढेर तो हो सकते है मगर चटटान या सिला सिद्ध नही हो सकते जिनकी आयु आदि अनादि और शनै शनै सुनिश्चित होता है जब गिटटी गारे का ढेर की सीमेन्ट के साथ सिला ईमारत का जीवन सुनिश्चित होता है इसलिये हर सामथ्र्यशाली पुरूषार्थी का धर्म और कर्म होना चाहिए कि वह श्रेष्ठजनो के मार्गदर्शन मे , उनका संरक्षण कर आगे बढ़े और मानव जीवन की सिद्धता सिद्ध करे न कि समय बर्बाद कर मानवता को कलंकित करे शायद मौजूदा जीवनो का यह बिषय न हो मगर सत्ता शासको का धर्म होना चाहिए कि वह सत्य के साक्षी बन इस सृजन और जीवन के मूल को सार्थक श्रेष्ठ बनाये । जय स्वराज । 


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