गुर्जर समाज ने लिया दहेज प्रथा पर रोक लगाने का संकल्प दहेजबंदी महापंचायत में हुआ निर्णय, शादी में 12,400 रुपये करेंगे गुर्जर समाज के लोग
शिवपुरी। संत श्री 1008 हरिगिरि जी महाराज के सानिध्य में दहेजबंदी को लेकर 15 जून शुक्रवार को करहधाम आश्रम पटिया वाले पर दहेजबंदी महापंचायत सम्पन्न हुई। जिसमें शिवपुरी जिले के गुर्जर समाज के लोग भी एकत्रित हुए महापंचायत में संत श्री हरिगिरी जी महाराज द्वारा गुर्जर समाज के लोगों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपनी बेटी की शादी में होने वाली खर्च समस्त रस्मों पर सिर्फ 12 हजार 400 रुपये ही खर्च करेगेंं। जिसमें 5100 रुपये का भात, 5100 रुपये का बेला 1100 रुपये की लगुन व टीका पर खर्च कर सकेगें व उपहार के तौर पर विदाई के साथ कूलर, पंखा व 5 बर्तन देने का निर्णय महापंचायत में लिया गया है। महापंचायत करीब 25 हजार लोग एकत्रित हुए जिसमें मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, दतिया आदि जगह के लोग पहुंचे। सभी ने दोनो हाथ उठाकर दहेजबंदी का पूर्णत: समर्थन किया और संकल्प लिया कि हम दहेज न लेने, न ही देेगें संकल्प लिया। सतं श्री हरिगिरि महाराज ने कहा समाज व्याप्त बुराईयां, शराबबंदी, मृत्युभोज, फिजूलखर्ची आदि को बंद करने के बाद दहेजबंदी अभियान शुरु किया गया। जो देव उठनी एकादशी से पूरी तरह से अमल में शुरु करना होगा। जो इस दहेजबंदी अभियान पर अमल नहीं करेगा। अगर अपनी बेटी की शादी में दहेज या बेटे की शादी में दहेज मांगेगा या लेगा तो उसका सामाजिक वाहिष्कार किया जाएगा। यह फैसला सभी के लिए लागू किया गया। महापंचायत में महाराज जी ने कहा कि दहेज के कारण समाज में भ्रूण हत्या, गृहकलेश, बालिका अशिक्षा, दहेज प्रताडऩा और द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाए जा रहे है। जब तक हम दहेज के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तब तक बेटी पढ़ाओं, बेटी बचाओं का नारा सार्थक होने वाला है। महाराज जी ने सभी समाज संगठन, सामाजिक कार्यकत्र्ता व संगठनों से महापंचायत में अपील की है। कि वह दहेज जैसी कुप्रथा से बचाने के लिए आगे आये। और इस अभियान को सफल बनाऐं। इस महापंचायत में शिवपुरी से गुर्जर समाज विकास समिति के अध्यक्ष आर.एन.सिंह सेवानिवृत कार्यपालन यंत्री, जंडेलसिंह पूर्व उपाध्यक्ष, जिला पंचायत अमरसिंह कोटिया, लक्ष्मणसिंह, छत्रपालसिंह, अवतारसिंह, फतेहसिंह, कप्तानसिंह सेकेट्री, पदमसिंह, सरमनसिंह, सुघरसिंह सूबेदार, सुरेन्द्रसिंह, धर्मेन्द्रसिंह, गोंविदसिंह आदि गुर्जर समाज के लोग शामिल हुए।

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