उडऩ खटोला छोड़, करोड़ के रथ पर सवार, भगवानों के आर्शीवाद को निकले पुजारी


विलेज टाइम्स समाचार सेवा ।
56 भोग के नाम गरीब जनधन से भण्डारा लुटाने वाले पुजारी एक मर्तवा 14 वर्ष बाद फिर लग्झरी रथ में सवार जन आर्शीवाद को मय अण्डी बच्चों के निकले है। मगर जनता के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, शुद्ध पेयजल, रोजगार को लेकर मचे हाहाकार के बीच लोकतंत्र की भगवान जनता कितना आर्शीवाद उड़लेगी यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में। मगर स्वयं भू अहंकारी सत्ता के यसोगान के बीच उसकी क्या नियति रहेगी। यह सवाल आज भी यक्ष है। 
ये अलग बात है कि सियासी कूटनीतिक साम, नाम, दण्ड भेद के आगे धरासायी विपक्ष कितनी जेहनत 14 वर्ष के वनवास पश्चात सत्ता प्राप्ति के लिए उठा पाता है। कहना फिलहाल मुश्किल है। मगर जो परिदृश्य फिलहाल सामने है। उसे देखकर तो फिलहाल यहीं कहा जा सकता है कि विपक्ष पूरी तरह अभी भी सत्ता पक्ष की बखिया उधेड़ जनता के सामने सच लाने तैयार नहीं। 
अगर विपक्ष स्पर्शी, अप्रमाणिक, प्रचार के बीच जनाक्रोश को धार देने में सफल और कॉग्रेस आलाकमान कड़े निर्णये लेने में सक्षम रहा, तो कोई कारण नहीं जो उसे म.प्र. में प्रचण्ड जन आर्शीवाद न मिले। 
मगर यह तभी संभव है जब आलाकमान ऐसे लोगों पर नियंत्रण जो विचार धारा के विपरीत व्यानबाजी कर कॉग्रेस को कमजोर करने का कार्य करते रहे है या कर रहे है। साथ ही प्रादेशिक नेतृत्व, रणनीतिकारों को ऐसे लोगों को ससम्मान संगठन में स्थान जबावदेही सौंपना होगी जो कॉग्रेस विचारधारा से औपचारिक अनौपचारिक रुप से जुड़े है। जो चापलूस कम, प्रखर वक्ता, अच्छे संगठन साबित हो सकते है। क्योंकि इस चुनाव में संघर्ष इतना सरल, सहज रहने वाला नहीं जैसा कि विपक्ष मानकर चल रहा है। 
अगर कॉग्रेस को वाक्य में ही जन आर्शीवाद चाहिए तो उसे साफ करना चाहिए अपनी प्रकृति अनुरुप कि कॉग्रेस कहने में कम करने में अधिक विश्वास रखती है और सभी को साथ लेकर विकास का एजेन्डा तय करती है जिसके लोकतंत्र में प्रमाण भी है और प्रमाणिकता भी। 

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