गैर इरादतन जल समाधि में 10 दर्दनाक मौत कलेक्टर का निर्जीव पत्र बनेगा कवच
दि.एम.पी.मिरर
अजीव दास्ता है, मेरे लोकतंत्र की,जो निर्जीव पत्रों के माध्यम से बड़े से बड़े कष्ट, जिन्दा लोगों के हर लिए जाते है। अभी हॉल ही में बीमारू राज्य से तेज विकासशील राज्य का तमगा लिए महान म.प्र. के शिवपुरी जिले पर 9 सुल्तानगढ़ व पवा जल प्रपात पर सैलाब मेें वह जाने, डूब जाने से सेकड़ों जिन्दगियों के रहते, इतने बड़े सर्वकल्याणकारी, जनकल्याणकारी निजाम, शासन, सरकार के रहते गैरइरातन जल समाधि मौत से नहीं बचा सकी।
मगर कहते है कि देर आए, दुरुस्त आए, कलेक्टर का निर्जीव पत्र तो अब गैर इरातन दुर्घटनाओं का कवच बनेगा, जिससे अकाल मौंते न हो।
मगर यहां यक्ष सवाल यह है या समझने वाली बात यह है कि जिस वन क्षेत्र में यह दर्दनाक मौते हुई। क्या उस बन वीट में कोई फॉरेस्ट गार्ड, फॉरेस्टर डिप्टी रेन्जर, रेन्जर स्तर के अधिकारी तैनात नहीं, क्या अनुभाग अधिकारी, वन मण्डल अधिकारी की पहुंच से यह क्षेत्र दूर है ? सुल्तानगढ़ जहां 9 व्यक्तियों की बहने से व पवा में एक बालक की डूबने से मौत हुई है।
क्या विधायक, जनपद अध्यक्ष, जनपद सदस्य, सरपंच, सचिव व सयुक्त वन प्रबन्धन, सुरक्षा समितियों का इन क्षेत्रों से कोई वास्ता नहीं ? पंचायत, सचिव, रोजगार सहायक व संयुक्त वन प्रबन्धन, वन सुरक्षा समितियों को कोई वास्ता नहीं ?
क्या इन क्षेत्रों में वन विभाग की कोई गतिविधि, देखरेख नहीं ?
क्या यह क्षेत्र,कुपोषण, मध्ययान भोजन व आशा कार्यकत्र्ता एनएएम की पहुंच दूर है ?
क्या सुल्तानगढ़, पवा जैसे पर्यटन स्थल राजस्व विभाग के किसी मजरा, टोला, टप्पा क्षेत्र में न होकर वेचिराग क्षेत्र में आते है, जहां न तो कोई चौकीदार, पटवारी, आर.आई. नायब तेहसीलदार तैनात है ?
क्या यह पुलिस महकमें की सुरक्षा वीट नहीं और न ही कोई वीट आरक्षक, प्रधान आरक्षक, ए.एस.आई, एस.आई तैनात नहीं, क्या सुल्तानगढ़, पवा जैसे पर्यटन स्थल किसी थाना क्षेत्र की मिलकीयत नहीं ?
क्या अनुविभाग अधिकारी केे निरीक्षण क्षेत्र में सुल्तानगढ़, पवा नहीं आते, क्या कृषि विस्तार अधिकारी व कृषक मित्रों सहित शासकीय उचित मूल्य की दुकान वालो का इन क्षेत्रों से कोई सम्पर्क नहीं, जो इस क्षेत्र के लोगों की जानकारी रखते हों ?
क्या सुल्तानगढ़, पवा से जुड़े क्षेत्र शिक्षा विहीन है, जहां न तो कोर्अ ई.जी.एस केन्द्र है, न ही प्राथमिक विद्यालय ?
रहा सवाल बाढ़, आपदा नियंत्रण केन्द्र जो कलेक्टर कार्यालय से सटा है, क्या दूरभाष नम्बर तक सीमित है ?
सवाल अनेक है मगर इस समय शौक का छड़ है जहां युवा बच्चों ने अपनी जाने गवाई है। मगर समझने वाली बात यह है, और सावधान रहने वाली बात यह है कि जब भरी दोपहरी लगभग 2:30 बजे बारिश के बीच सैलाब में लगभग 9 लोगों के जिन्दा वह जाने के बाद 30 में से 5 लोगों को ही देर रात तक जिन्दा निकाला जा सके। शेष को जिन्दा बचाने सैलाब उतरने के इंतजार के साथ स्थानीय 3 जांबाजो की मदद से शेष लोगों को बचाया जाये। तो जान के प्रति सावधान तथा सरकार का ऐहसान बंद होना चाहिए तथा कलेक्टर का शुक्रिया करना चाहिए जिन्होंने पत्र के रुप में कम से कम भविष्य में ऐसी घटनाऐं न हो, निर्जीव पत्र के माध्यम से इस क्षेत्र ही नहीं, समुचे जिले के लोगों को एक अभेद कवच तो प्रदान करने की कोशिश की, जो सराहनीय कहा जायेगा।

Comments
Post a Comment