पहले धंधा, अब चंदा सेवा कल्याण की पराकाष्ठा से बिलबिलाते लोग
व्ही.एस.भुल्ले
अब इसे हम हमारे महान लोकतंत्र या लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेवा कल्याण की पराकाष्ठा कहे या फिर सुशासन या इसे अपना भाग्य या दुर्भाग्य। कि जिस राज्य में पीडि़त, वंचित, आभावग्रस्त, नैसर्गिक सुविधाओं को मोहताज डकराते गांव गली के बिलबिलाते लोग घूम रहे हो। सुना है ऐसे प्रदेश में सत्ता भक्तों की मंडली चुनावी बेतरणी पार करने की गरज से चंदे के रुप में सहयोग हासिल करने निकल पड़े। मीडिया में छपी खबरों की माने तो शिव के शहर शिवपुरी में भी सत्ता के बड़े-बड़े ओलिया और भक्तों की भीड़ का मंच लगा था और महंतों की मंडली से हासिल निर्देशों के तहत चंदे का निर्धारित टारगेट भी हाथों हाथ सार्वजनिक हुआ था। जिसमें हर विधानसभा से लगभग 25-25 लाख का जनसहयोग निर्धारित है।
जय स्वराज

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