अन्तराष्ट्रीय पर्यटन व राष्ट्रीय सुरक्षा से रेल मंत्रालय का खिलबाड़
व्ही.एस.भुल्ले, मुख्य संयोजक स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. लगभग 25 वर्ष पूर्व पूर्ण हो चुके सर्वे पश्वात रेल मंत्रालय को फुरसत नहीं कि अन्तराष्ट्रीय कोष और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सबसे अहम प्रस्तावित रेल मार्ग के कार्य को स्वीकृत कर तत्काल शुरु कराया जाये। क्योंकि उसे नहीं लगता कि रेल मंत्रालय को संचालित करने वाले रेल मंत्री की पार्टी को इस रेलमार्ग के बनने से थोकबंद वोट मिलेगें। इसलिए कभी ग्वालियर-श्योपुर नैरोगैज को बड़ी लाइन में बदलने की बात होती है तो कभी बुधनी से जबलपुर को जोडऩे की स्वीकृति राजनैतिक दबाव में दी जाती है। जो कि सबसे अहम प्रस्तावित रेल मार्ग सवाई माधौपुर से झांसी रेल मार्ग से काफी लंबे भी है और खर्चीले भी।
बहरहाल ग्वालियर-श्योपुर और बुधनी, जबलपुर रेल मार्ग भी बने। मगर सबसे पहले 25 वर्ष पूर्व सर्वे हो चुके। झांसी-सवाई माधौपुर रेलमार्ग की स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरु हो। क्योंकि मात्र 250 किलोमीटर लंबे झांसी- सवाई माधौपुर रेलमार्ग बन जाने से पूर्व-पश्चिम की सीमाऐं सीधे जुड़ जायेगीं और सिल्चर से लेकर जैसलमेर तक के सीधे रास्ते खुल जायेगें। जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अहम है। अभी रेलमार्ग से पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर तक जाने के लिए या तो वाया बीना रेलमार्ग या फिर वाया आगरा, मथुरा होकर है। जिसके लिए लगभग 500 से 600 कि.मी. का फैरा मुख्य रेलमार्ग से लगाना होता है। अगर झांसी को रेलमार्ग से सवाई माधौपुर तक जोड़ दिया जाता है। जो कि विगत 25-30 वर्षो से प्रस्तावित है तो यह दूरी घटकर मात्र 250 कि.मी. रह जायेगी और रेल व सड़क मार्ग के ट्रािफक में भी कमी हो जायेगी। जिससे राष्ट्र को सुरक्षा की दृष्टि से एक फायदा यह होगा कि कभी भी युद्ध की स्थिति में सेना, रसद पूर्व से पश्चिम छोर तथा पश्चिमी छोर से पूर्वी सीमा तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है।
इतना ही नहीं अगर अन्तराष्ट्रीय पर्यटन की दृष्टि से देखे तो इस रेल मार्ग के बन जाने से इस मार्ग पर मौजूद महत्वपूर्ण पर्यटन सर्किट बन सकता है। जो पर्यटकों को दिल्ली से वाया, मथुरा, आगरा, भरतपुर, जयपुर होते हुए सवाई माधौपुर के रणथम्बौर से कूनो, माधव नेशनल पार्क तथा झांसी, शिवपुरी, ओरछा, खजुराहो के ऐतिहासिक, धार्मिक,पुरातत्व स्थलों सहित पन्ना के राष्ट्रीय उद्यानो का लाभ सीधे मिल सकता है। इतना ही नहीं, सवाई माधौपुर से झांसी के बीच पडऩे वाले घने जंगल, चम्बल, पार्वती, कूनों, महुअर, सिन्ध जैसी नदियों के मनोरम दृष्यों का भी लुप्त पर्यटक उठा सकते है। प्राकृतिक सुन्दरता व ऐतिहासिक धरोहरों, झरने बड़े-बड़े बांधों से पटे इस क्षेत्र में प्राकृतिक सौन्दर्य की अकूत संपदा मौजूद है। जो पर्यटन उद्योग व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कमाने की दृष्टि से अहम है।
मगर रेल मंत्रालय की उपेक्षा के चलते इस रेल मार्ग की चर्चा न होना इस राष्ट्र के लिए दुर्भाग्य पूर्ण है। अगर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका संज्ञान ले तो यह राष्ट्र की सुरक्षा और पर्यटन की दृष्टि से देश के लिए उनकी यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। क्योकि यह क्षेत्र स्वर्णयम चतुर्भुज फॉरलेन मार्ग का भी केन्द्र है। मगर रेलमार्ग का न होना इस केन्द्र के मुंह पर एक बंदनुमा दाग जिसका निवारण इस देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

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