वोट के लिए झूठ और सत्ता के लिए षडय़ंत्र धन पिपासूू मीडिया का लोकतंत्र से खिलबाड़ सेवा के नाम, शोषण पर उतारु सक्षम, समर्थ सत्ता, संगठन


व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
सुबह से शाम तक सत्ता के लिए वोट हासिल करने झूठ और सत्ता के लिए षडय़ंत्र की पराकाष्ठा उन धनपिपासू, लालसी मीडिया व प्रचार माध्यम के कुछ सहयोगियों के साथ जो हो रही है। उन षडय़ंत्रकारियों को शायद यह नहीं पता कि ही बसुदेव कुटुम्बकम की महान संस्कृति, संस्कारों वाली सभ्यता से चिरपरिचित इस महान कौम के लोग विश्व के समूचे भूभाग पर कभी सबसे अधिक सफल, सम्पन्न, समृद्ध, खुशहाल और सामर्थशाली थी और आज भी है तथा विश्व में भी रहेगी।
मगर तब न तो वह धन पिपासूू मीडिया और प्रचार के माध्यम और सत्ता के षडय़ंत्रकारी इस महान भूभाग के महान लोकतंत्र में न होगें। ऐसी आशा-आकांक्षा की जा सकती है। आज जिस तरह से निहित स्वार्थ, सत्ता लालचियों की वोट कबाड़ू गैंग, गिरोहों में तब्दील संगठन इस महान राष्ट्र इसके राज्य, गांव, गली, गरीब को जिस मुकाम पर ला खड़ा किया है और यह महान लोकतंत्र जिस तबाही बर्बादी के दौर से गुजरने पर मजबूर है वह किसी से छिपा नहीं। जो कौम कभी अपनी महान त्याग, तपस्या बन्धुत्व, दया, सव्र, संयम और सर्वकल्याण के भाव त्याग के नाम जानी थी। आज क्यों वह जरा-जरा सी बातों पर आक्रोशित संसकित या बैवस, मजबूर नजर आती है। 
वहीं सत्ता, संस्था, संगठनों के बीच से सहिष्णुता, शर्म, पश्चाताप का भाव भी उनमें नजर नहीं आता है। आज अधिकांश संस्था, संगठन गिरोह बंद हो, सृजन को सर्वोत्तम खाखे से इतर, मंचों, प्रचार माध्यमों के जरिये सफेद झूठ बोल या एक दूसरे की गरिमा को कालिख पोत, वोट हासिल करने प्रलोभन, षडय़ंत्र कर सत्ता हासिल करना चाहती है। पहले लोकतांत्रिक व्यवस्था, संस्था और अब समाज की हजारों वर्ष व्यवस्थित, स्वीकार्य सर्वमान्य महान व्यवस्था तथा उसकी प्रतिष्ठा को भी वोट और सत्ता के लिए तार-तार करने से नहीं चूक रहे। 
मगर वोट देकर स्वयं को लोकतंत्र का सबसे बड़ा सिपाही या थोकबंद वोट डलवाने वाले गांव, गली के उन कमान्डेंट, मुखिया तथा जागरुक इंसानों के लिए सबसे बड़ी समझने वाली बात यह है कि इन 30 वर्षो में इस महान देश इसके प्रदेश, गांव, गली में ऐसा क्या हुआ जो नैसर्गिक सुविधाओं के नाम कुये, तालाब, नदियां सूख रही है। दूध, दही, छाच, घी के श्रोत कट रहे है। नकली दूध का अम्बार बढ़ रहा है, गांव, गलियों में मयखाने, गांजे, स्मैक जैसे जहर के सबसे बड़े कारोबार चल रहे है। शिक्षित होने के बजाये हमारे बच्चों, युवा, उत्पादक, मालिक बनने के बजाये रट्टू तौता, नौकर बन रहे है और नौकरी के अवसर भी मांग अनुसार अब तो उपलब्ध नहीं हो रहे। 
क्यों आज हमारा समृद्ध, खुशहाल, सुसंस्कृत समाज कहीं धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम एक दूसरे से वैमस्यता रखते है। असल राजधर्म, राष्ट्र धर्म तो यहीं था कि मुगल, अंग्रेजों के जाने के बाद इस दिशा में अहम कार्य होते। मगर आज जहां हम नैसर्गिक, प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं के मोहताज होते जा रहे है तो वहीं हम आज अभाव ग्रस्त जीवन जीने पर मजबूर होने के बावजूद कभी धर्म तो कभी जाति, वर्ग के नाम वोट कबाड़ू, गिरोहबंद सत्ता के षडय़ंत्रकारियों के षडय़ंत्र के तहत आपस में लड़ अपना और अपने बच्चों को वर्तमान भविष्य चौपट कर रहे। 
अगर हम जागरुक, समझदार लोग इतनी सी बात समझ पाये कि हमारे महान संविधान ने सभी को राष्ट्र निर्माण समृद्ध, समाज बनने का समान हक दिया है। सत्ता और सरकार में सहभागिता बनाने का अवसर वोट के माध्यम दिया है। तो फिर हम क्यों नहीं उन सत्ता सौपानों तक पहुंच पा रहे है। जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून, नीतियों के माध्यम से अपनो के भविष्य उज्जवल और उनका जीवन समृद्ध, खुशहाल बनता है। क्यों हम उन वोट कबाड़ू तथाकथित दलो के नाम दो पांच हजार गिरोहबंद, षडय़ंत्रकारियों का शिकार हो अपना वोट गवां देते है और अब तो अभावग्रस्त जीवन ही नहीं, दहशत पूर्ण जीवन जीने पर मजबूर हो जाते है। कब चक्काजाम, तोडफ़ोड़ हड़ताल, सामूहिक मारपीट जिनायन हक पाने के लिए जबरन पैसा बसूल लिया जाये। कब आपके हक को छीन लिया जाये। 
अगर ऐसी स्थिति से स्वयं और इस महान राष्ट्र राज्य, गांव, गली को बचाना है अपनी समृद्धि शान्ति, खुशहाली को पाना है, तो वोट और सत्ता के लिए सफेद झूठ बोल, षडय़ंत्र करने वालो से सावधान रह, उन्हें चुनावों में सबक सिखाना चाहिए और उन प्रचार माध्यमों से भी सावधान रहना चाहिए। जो धन लालसा के चलते अपने नैतिक कत्र्तव्य को तिलाजंली दें, अपनी जबावदेही की गैर जिम्मेदारना ढंग से बसूली कर हमारे महान भोले-भाले बैवस, मायूस मतदाता को दृगभूम्रित कर उन सत्ता लोलुप षडय़ंत्रकारियों का साथ देते है। तभी हम सच्चे और अच्छे लोकतंत्र की स्थापना पर अपने राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल और आवाम को समृद्धशाली बना सकते है। 
जय स्वराज  

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता