धरातल से दूर टिकटो का दावा* *राहुल पहुंचे ग्वालियर*
*वीरेंद्र शर्मा*
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यूं तो कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी अपने निर्धारित दो दिवसीय चुनावी दौरे पर ग्वालियर चंबल की यात्रा पर हैं। आज वह ग्वालियर पहुंचने के बाद दतिया के लिए रवाना हो गये। जहाँ पर वह रोड शो के अलावा सभाओं को संबोधित करेंगे।
मगर इस बीच सोशल मीडिया और समाचार पत्रों मे नित ढंग से टिकटों की लिस्टें छप रही और हार जीत को लेकर दावे चल रहे हैं। साथ ही जिस तरह से स्थानीय क्षेत्रीय मीडिया की अंदेखी हो रही हैं। यह सब कांग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते।मगर जिस तरह कांग्रेस के चमकदार नेता के रूप मे सिंधिया की लोकप्रियता समूचे ग्वालियर चंबल से नहीं मालवा से लेकर महाकौशल विध्यं, बुँदेलखण्ड से लेकर निमाड़ तक बड़ी हैं। उसको लेकर सियासी हल्को मे जबरदस्त खलबली हैं। कारण कांग्रेस आलाकमान का सिंधिया को सीधा बरदस्त और म.प्र. वरिष्ठ नेताओं का राहुल की मंशा अनुरूप म.प्र. का सियासी किला फतह कर राहुल के हाथ मजबूत करना हैं। मगर बगैर धरातल के टिकट दावेदार और अपना आज अस्तित्व बचाने टिकट दावेदारो के आका सच स्वीकारने तैयार ही नहीं। जबकि ग्वालियर चंबल ही नहीं बुदेलखंड, भिंड, निमाड़, महाकौशल, मालवा मे कई ऐसी सीटें हैं जिन पर राहुल ने संज्ञान और जनाकांक्षाओं का सम्मान नहीं किया तो परिणाम कुछ भी हो सकते है। खासकर डबरा, करैरा, पिछोर, पोहरी, बड़ामलेरा, टीकमगढ़, कटनी, राधौगढ़, जौवट, मुरैना, सिंगरौली, नरसिंहपुर, भोपाल, सीहोर, खंडवा, नीमच, इंदौर, उज्जैन, वेतूल, डिंढोरी ऐसी सीटें हैं जिन पर आलाकमान को गंभीरता से विचार कर समूची कांग्रेस को स्पष्ट संदेश देना चाहिए। साथ ही भाजपा आलाकमान अमित शाह के उस सवाल का भी जबाब जल्द ही देना चाहिए जो वह मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सभाओं मे कर रहे हैं।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यूं तो कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी अपने निर्धारित दो दिवसीय चुनावी दौरे पर ग्वालियर चंबल की यात्रा पर हैं। आज वह ग्वालियर पहुंचने के बाद दतिया के लिए रवाना हो गये। जहाँ पर वह रोड शो के अलावा सभाओं को संबोधित करेंगे।
मगर इस बीच सोशल मीडिया और समाचार पत्रों मे नित ढंग से टिकटों की लिस्टें छप रही और हार जीत को लेकर दावे चल रहे हैं। साथ ही जिस तरह से स्थानीय क्षेत्रीय मीडिया की अंदेखी हो रही हैं। यह सब कांग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते।मगर जिस तरह कांग्रेस के चमकदार नेता के रूप मे सिंधिया की लोकप्रियता समूचे ग्वालियर चंबल से नहीं मालवा से लेकर महाकौशल विध्यं, बुँदेलखण्ड से लेकर निमाड़ तक बड़ी हैं। उसको लेकर सियासी हल्को मे जबरदस्त खलबली हैं। कारण कांग्रेस आलाकमान का सिंधिया को सीधा बरदस्त और म.प्र. वरिष्ठ नेताओं का राहुल की मंशा अनुरूप म.प्र. का सियासी किला फतह कर राहुल के हाथ मजबूत करना हैं। मगर बगैर धरातल के टिकट दावेदार और अपना आज अस्तित्व बचाने टिकट दावेदारो के आका सच स्वीकारने तैयार ही नहीं। जबकि ग्वालियर चंबल ही नहीं बुदेलखंड, भिंड, निमाड़, महाकौशल, मालवा मे कई ऐसी सीटें हैं जिन पर राहुल ने संज्ञान और जनाकांक्षाओं का सम्मान नहीं किया तो परिणाम कुछ भी हो सकते है। खासकर डबरा, करैरा, पिछोर, पोहरी, बड़ामलेरा, टीकमगढ़, कटनी, राधौगढ़, जौवट, मुरैना, सिंगरौली, नरसिंहपुर, भोपाल, सीहोर, खंडवा, नीमच, इंदौर, उज्जैन, वेतूल, डिंढोरी ऐसी सीटें हैं जिन पर आलाकमान को गंभीरता से विचार कर समूची कांग्रेस को स्पष्ट संदेश देना चाहिए। साथ ही भाजपा आलाकमान अमित शाह के उस सवाल का भी जबाब जल्द ही देना चाहिए जो वह मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सभाओं मे कर रहे हैं।

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