धु्रवीकरण की जकड़ में लोकतंत्र अन्याय के विरुद्ध न्याय की हुंकार बाधित हुए कत्र्तव्य, अधिकार लूट-झूठ की न हो सरकार
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अन्याय के विरुद्ध न्याय की हुंकार तो इस महान लोकतंत्र में हर एक सियासी व्यक्ति, संगठन भर रहा है। क्योंकि यह भी सत्य है कि सेवा कल्याण के नाम लोकतंत्र में चले अंधड़, आंधी, तूफान ने जिस तरह से कत्र्तव्य अधिकारों का मार्ग बाधित किया है। उससे स्वस्थ लोकतंत्र में आम जन घुटन सी मेहसूस करने लगा है। जिसके चलते कई सियासी लोग ही नहीं कई संगठन भी हुंकार भर अन्याय के विरुद्ध न्याय का शंखनाद कर सियासी संग्राम में कूद पड़े है। वहीं यह चर्चा भी सरगर्म है कि इनकी हार नैया पार, लूट-झूठ की न हो सरकार। मगर धु्रवीकरण के रास्ते जिस तरह से सियासी लोग और सियासी संगठन बढ़ रहे है उससे लगता नहीं कि न्याय का रास्ता साफ होने वाला है। सत्ता को लेकर समाज, धर्म से लेकर जाति और लोक से लेकर तंत्र तक जिस तरह से, सत्ता लिए धु्रवीकरण का खेल चल रहा है। उससे अच्छे अच्छों बुर्ज ही नहीं, चूले तक हिलने वाली है। लगभग 200 वर्ष भारत में रहने और 70 वर्ष पूर्व भारत से अंग्रेजों के जाने के पश्चात ही फूट डालों शासन करो का फॉरमूला सत्ता के लिए इतना कारगार होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा।
आज चुनावों के बीच भी लगभग वहीं स्थिति जान पड़ती है मगर राष्ट्र सेवा कल्याण के नाम आजादी के लड़ाई तो अंग्रेजों से 70 वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने लड़ जीत ली थी। मगर सेवा कल्याण के नाम मौजूद सत्ता लोभियों, स्वार्थियों से कौन जीतेगा। जिससे सच्चे-अच्छे स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के साथ लोग समृद्ध, खुशहाल जीवन शान्तिपूर्ण ढंग से जी सके। निश्चित ही यह जबावदेही उन विद्या, विद्यवान, समझदार जागरुक लोगों की है तथा जबावदेहियों उन सक्षम, सशक्त लोगों की है। जो मानव सेवा, जीव-जगत, इंसानियत में विश्वास रखते है वह अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करते हुए भ्रम भटके लोगों को मार्गदर्शित कर उन्हें सहयोग करे जिससे हम अपने बहुमूल्य लोकतंत्र और आाजादी को अक्षुण रख, राष्ट्र व जन सेवा कर पाये और अपने ही लोगों का जीवन समृद्ध, सशक्त, खुशहाल बना पाये।
जय स्वराज
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