स्वार्थवत सत्ताओं का समृद्धि पर संज्ञान अहम, अंहकार को आइडिया की दरकार


विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अब इसे सियासत कहे या स्वार्थवत सत्ताओं का येन चुनाव के वक्त, एक मर्तवा फिर से आशा आकांक्षाओं का दोहन वह भी इस शर्त के साथ खुल्लम,खुल्ला अगर है ज्ञान मे दम, तो उसे पूरा करेंगे हम।
अब ऐसे मे यक्ष सवाल यह है कि आयडिया के 12 आने और मेहनत के चार आने का सिद्धांत जो स्वार्थवत सत्ताओं मे स्वीकार नहीं। वहां तो आयडिया के  े4 आने, तो चापलूसी के 12 आने। धन्यवाद तो दूर,सक्ल पहचानने में भी उन्हें दर्द होता है। क्योंकि चालक, चापलूस, बौद्धिक चोरो की जर खरीद हाइटेक टीम पूरी कीमत चुकाने के बाद उनकी गोद में जो जा बैठी है। यहां समझने वाली बात यह है कि जो आइडिया कड़ी मेहनत या प्राराब्ध से नसीब होते है जिनमें त्याग-तपस्या ही नहीं, इस अर्थ युग में लाखों खर्च करने के बाद तैयार होते है। उन्हें सिर्फ भावुकता बस, कभी राष्ट्र, धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम फ्री फोकट मे कोई लुटा दे यह कैसे संभव है। जबकि सेवक अखंड, स्वार्थ के सागर में डूबे हो और बौद्धिक चोरों की जमात ऐसी कि आइडियो को सार्थक होने से पहले या समर्थ होने से पहले ही हाईटेक तकनीक के माध्यम से चुरा ले। 
देखा जाए तो आइडिया ही है जिसे लोग विश्व में बिलगेट कहते हैं आइडिया ही है जिसे लोग अमेजॉन कहते हैं। अगर किसी से पूरा मंत्र सीखा होता तो संस्कृति अनुसार पूरा दाम, संसाधन सहित और कर्ता की योग्यता अनुसार उसे वाजिब दाम मान सम्मान दिया होता तो, आज सत्ताओं को यह दिन न देखना होता, न ही आवाम को ऐसा जीवन भोगना होता। अगर अपनी महान संस्कृति से कुछ सीखा होता तो, जिसे लोग विश्व की महाशक्ति मानते है और जिसे लोग विश्व भर में अमेरिका के नाम से जानते है। अगर उसी से कुछ सीख लिया होता तो आज कोई प्रदेश ही नहीं, समूचा देश मात्र एक वर्ष मे ही समृद्ध खुशहाल हो सकता था। समृद्धि, खुशहाली के लिए दो पांच वर्ष नहीं एक वर्ष ही काफी है। मगर अहम अहंकार का क्या करें। जिसका जन्म समृद्धि, खुशहाली, सर्वकल्याण के बजाये, सर्वनाश के लिए ही होता है।  
जय स्वराज

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