सपाक्स के सामने खुला मैदान
वीरेंद्र भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।मध्यप्रदेश में भले ही भाजपा 15 वर्ष की सत्ता, संसाधन व संपन्न नेताओं की दम पर चौथी मर्तबा मध्य प्रदेश में सरकार बना सत्ता हासिल करने को मंसूबा पाल शासन के खजाने को साफ कर तथा म.प्र. पर डेढ़ लाख करोड़ के कर्ज की परवाह किए बगैर घोषणा पर घोषणा कर चुकी हो। वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच उलझ धन-बल व कार्यकर्ता बल की समस्या का सामना करते हुए जवानी जमा खर्च के सहारे सत्ता की जुगत लगने लगी हो। मगर जिस तरह से बसपा व स.पा. ने ऐन वक्त पर कांग्रेस को झटका दें, भाजपा का रास्ता चम्बल, बुदेंलखंड, वघेलखंड में आसान करने का कार्य किया हो। जैसे कि आम चर्चा है और स्वयं राजनैतिक दलों के आपसी आरोप-प्रत्यारोप रहे हो। उससे नवउदित सपाक्स की बांछे खिलना स्वभाविक है। अगर ऐसे में सपाक्स व्यावहारिक रणनीत बतौर आगे बढ़ती है। तो सियासी तौर पर उसके सामने मैदान फिलहाल खाली है। अब यहां समझने वाली बात यह है कि जिस तरह से सत्ताधारी दल भाजपा जन, धन, बल की स्थिति में सबल है, तो वहीं 15 वर्ष बाद सत्ता की आस लगाए बैठी कांग्रेस भी क्षेत्रीय स्तरों पर कुछ कमतर नहीं है। ऐसे में तथाकथित धन पिपासू व्यावसायिक मीडिया का झुकाव भी ऐसे दलों प्रति होना स्वभाविक है। जो आर्थिक रूप से सक्षम और सबल है। मगर जहाँ तक सपाक्स को जनधन व बूथ बल सहित मीडिया के बीच पैठ बनाना है तो वहीं दूसरी ओर उसे संगठन संचालन तंत्र भी बढ़ाना होगा तब जाकर वह मध्य प्रदेश के सियासी मैदान पर खुलकर खेल पाएगी।
रहा सवाल बसपा,सपा,लोसपा या अन्य दलों का तो उनका अपना-अपना जनाधार और मुद्दें है। मगर क्षेत्र विशेष में पैठ रखने वाले यह दल भी अपनी-अपनी दम पर ताल ठोकने में लगे हुए। अब जब चुनाव आचार संहिता लग चुकी है और चुनावों की तिथि भी घोषित हो चुकी है और राजनैतिक दलों की प्रारंभिक तैयारियां चरमोत्कर्ष पर है। ऐसे में देखना होगा कि अन्याय के खिलाफ न्याय के लिए शुरू हुए इस संघर्ष का अंजाम क्या होगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर इतना तय है कि रोजमर्रा की समस्या एवं नैसर्गिक सुविधाओं, संसाधनों से आए दिन दो चार होने वाली आम जनता जो चुप है वह इन राजनैतिक दलों की झूठी घोषणाओं, प्रचार-प्रसार और कभी न पूरे होने वाले घोषणा पत्रों तथा अघोषित अप्रमाणिक तौर पर कहीं धर्म, जाति, क्षेत्र, नाते-रिश्तेदारी व सत्ता में अघोषित भागीदारी के माया मोह में फंस फिर किसी ऐसी सरकार को लाती है। जो राष्ट्र व जनसेवा के नाम अभी तक सत्ता सुख, घोषित-अघोषित तौर पर भोगते रहे है या फिर ऐसे स्वच्छ छवि, ईमानदार, कत्र्तव्य निष्ठ लोगों को वोट दें, अपना प्रतिनिधि बनाती है। जो उनके जीवन व उनकी आने वाली पीढ़ी के जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने में सक्षम व सफल साबित हो।
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