किसका हो, राज तिलक समय सक्षम, समर्थ प्रत्याशी चुनने का 28 नवम्बर का मतदान तय करेगा समृद्धि, खुशहाली


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
कहते है कि जब कोई व्यक्ति, संस्था, संगठन, दल, स्वच्छ, सर्वकल्याणकारी नीति, विचार, सिद्धान्त, सेवा कल्याण को दरकिनार कर, सत्ता नीति में जुट जाते है। तो ऐसे में उनकी दुर्गति होना स्वाभाविक है।
र्दुगति तो उन विधा, विद्ववान, संवाद, सूचना तंत्रों की भी होती है। जो लोकतंत्र के महाकुंभ चुनाव के वक्त लोकतंत्र की मालिक जनता द्वारा 5 वर्ष के लिए सेवा कल्याण के लिए सच्चे और अच्छे सेवाभावी प्रत्याशियों को चुनती है। ऐसे में उस महान जनता की आशा-आकांक्षाओं के ताबूत बैठ सत्ता उन्नमुख, स्वार्थवत राजनीति के इशारे पर सस्ती सृजनपूर्ण शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, समृद्धि, खुशहाली, सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को दरकिनार कर, भ्रमपूर्ण बेसुरा डोल बजाती है। कर्ज सूतखोरी तो बैसे भी अनादिकाल से किसी भी सभ्य समाज में या व्यवस्था में अच्छी आदत नहीं मानी जाती और 
दरिद्रता हमेशा अस्वीकार रही है। 
ऐसे में साढ़े 7 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश पर लगभग 2 लाख 15 हजार करोड़ के लगभग कर्ज आधे से अधिक आबादी सस्ते राशन, सुविधा, खादय, बीज, पानी, डीजल, पैट्रोल की मोहताज हो और आदि के करीब आबादी अल्प रक्त की शिकार तथा 60 फीसदी युवा बेरोगार हो। ऐसे में सफलता, सक्षमता और सार्थकता पर विचार अवश्य मतदान देने से पूर्व होना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में आम मतदाता का मत ही वह ताकत होती है। जो उसकी समृद्धि, खुशहाली का निर्धारण अच्छे और सच्चे सेवाभावी प्रत्याशियों को चुनकर सुनिश्चित करती है। अब जबकि 28 नवम्बर को एक बार फिर से 5 वर्ष के लिए चुनाव होना है। ऐसे में हर नागरिक मतदाता का सजग रहना, जागरूक होना आवश्यक है। 
अगर 28 नवम्बर को हम अच्छे और सच्चे सेवाभावी समर्थ जनप्रतिनिनिधि में चुनने में सफल रहे, तो निश्चित ही गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचित, मेहनतकश लोगों की समृद्धि, खुशहाली संभव है।

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