- प्रचंड जनादेश या जनाक्रोश - 3 फीसदी मतों में छिपे यक्ष सवाल - आयोग का कारवां कामयाब, खराब बीबी,पेडो ने बिगाड़ी फिजा - स्वच्छ शान्तिपूर्ण व्यवस्थित मतदान की हुई सराहना - रिकार्ड वोटिंग के बीच 74.85 प्रतिशत मतदान - 5 करोड़ कुल वोटरों में से 3 करोड़ 77 हजार ने ही डाले वोट - महिलाओं के मतदान में 2.72 प्रतिशत का इजाफा
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
प्रचंड मतदान के बीच भले ही अपने-अपने पक्ष में हवा बनाने यक्ष सवालों से इतर सुनियोजित मुद्दों को मुख्य भूमिका में लाने की कोशिश निर्वाचन के दौरान करोड़ों फूंक होती रही हो। मगर जनता का दर्द सस्ती सृजनात्मक शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, जीवोत्पार्जन के संसाधन और विषबेल बन चुका भ्रष्टाचार ही बना रहा। जिसकी चर्चा शोर-सरावे से दूर भ्रामक प्रचार से दूर बनी रही। अब जबकि मतदान हो चुका है। ऐसे में कयासों का बाजार कम नहीं। यूं तो भारतीय लोकतंत्र में संभावनाओ का बाजार हमेशा से समृद्ध रहा है। मगर लगभग पौने 3 फीसदी के करीब बड़े मतदान में छिपे यक्ष सवाल फिलहाल बाजार गर्म किए हुए है।
ये अलग बात है कि 11 दिसम्बर को आने वाले परिणामों में संभावनाओं का सच सभी के सामने होगा। मगर 2018 के प्रचंड मतदान की संभावनाऐं अगर सुनामी साबित हो, तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि आधे से अधिक सस्ते राशन, शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल, अल्परक्त और बेरोजगारी के शिकार लोगों की पीड़ा और आम जन का गुस्सा जीवोत्पार्जन को लेकर चर्मोत्कर्स पर देखा गया। फिलहाल सच क्या है ये तो आने वाला समय ही तय करेगा। मगर संभावनाओं के रथ पर सजी संभावनाओं की ध्वज पताकाऐं खुशहाल, समृद्ध, जीवन की आशा-आकांक्षाओं के बीच संभावनाओं के बाजार में धूम मचायें हुए है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
प्रचंड मतदान के बीच भले ही अपने-अपने पक्ष में हवा बनाने यक्ष सवालों से इतर सुनियोजित मुद्दों को मुख्य भूमिका में लाने की कोशिश निर्वाचन के दौरान करोड़ों फूंक होती रही हो। मगर जनता का दर्द सस्ती सृजनात्मक शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, जीवोत्पार्जन के संसाधन और विषबेल बन चुका भ्रष्टाचार ही बना रहा। जिसकी चर्चा शोर-सरावे से दूर भ्रामक प्रचार से दूर बनी रही। अब जबकि मतदान हो चुका है। ऐसे में कयासों का बाजार कम नहीं। यूं तो भारतीय लोकतंत्र में संभावनाओ का बाजार हमेशा से समृद्ध रहा है। मगर लगभग पौने 3 फीसदी के करीब बड़े मतदान में छिपे यक्ष सवाल फिलहाल बाजार गर्म किए हुए है। ये अलग बात है कि 11 दिसम्बर को आने वाले परिणामों में संभावनाओं का सच सभी के सामने होगा। मगर 2018 के प्रचंड मतदान की संभावनाऐं अगर सुनामी साबित हो, तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि आधे से अधिक सस्ते राशन, शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल, अल्परक्त और बेरोजगारी के शिकार लोगों की पीड़ा और आम जन का गुस्सा जीवोत्पार्जन को लेकर चर्मोत्कर्स पर देखा गया। फिलहाल सच क्या है ये तो आने वाला समय ही तय करेगा। मगर संभावनाओं के रथ पर सजी संभावनाओं की ध्वज पताकाऐं खुशहाल, समृद्ध, जीवन की आशा-आकांक्षाओं के बीच संभावनाओं के बाजार में धूम मचायें हुए है।
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