5 वर्ष में, सत्तासीन सेवक हुए मालामाल, तो जनता हुई कंगाल 2 लाख 15 हजार करोड़ के कर्ज में डूबा प्रदेश सेवा कल्याण हुआ, बेहाल

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस प्रदेश पर 2 लाख 15 हजार करोड़ का कर्ज, आधे से अधिक आबादी सस्ते राशन, सृजनपूर्ण शिक्षा, सहज, स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, संसाधनों की मोहताज के अलावा अल्परक्त कुपोषण की शिकार हो और गांव, गली, शहर की सड़कों पर अनयंत्रित अप्रशिक्षित हाथों में दौड़ते वाहन हो, बहुमूल्य, पशुधन, भूख, प्यास, सड़कों पर मौंत के शिकार हो, विकास के नाम बेरोजगार हाथ, रोजगार के लिए बेकार हो। ऐेसे में सत्तासीन सेवकों की आय में मात्र 5 वर्ष में अप्रत्याशित आय वृद्धि के आंकड़े इस बात के गवाह है कि अगर गांव, गली, नगर, शहरों के नये धन कुबेरों के आंकड़े खंगाले जाए तो शायद इन सेवकों के चैले-चपाटे समर्थकों की लंबी-चैड़ी फैरिस्त निकले तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। 
फिलहाल तो म.प्र. सरकार के 28 मंत्रियों की लिस्ट में 23 मंत्रियों की आय वर्ष-2013 से 2018 तक अघोषित से लेकर घोषित आय में एक मंत्री जी की तो 1 हजार 239.76 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। अगर ऐसे में प्रदेश पर 2 लाख 15 हजार करोड़ का कर्ज है तो जनता मालिक होकर भी कंगाल हो ली, लंबे-चैड़े कर्ज में दबी है और उसके 60 फीसदी युवा रोजगार के मोहताज तथा 2 करोड़ 20 लाख लोग म.प्र. में संबल योजना के पात्र है। जिन्हें सस्ती बिजली से लेकर कई सेवा, सुविधाओं की आवश्यकता के साथ आशा-आकांक्षा है। 
जय स्वराज

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