निठल्ली होती, मानवशक्ति, कब जागोगे महान मतदाता 60 फीसदी जवान कौम, काम को मोहताज गड़बड़ाते पर्यावरण प्रबंधन के परिणाम सभ्य, सुसंस्कृत, समाज को घातक


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
सरकारी सम्पत्ति आपकी अपनी है, समय सोना है, इस बर्बाद न करें। जैसी कहावतें, कवि पढ़ने, सुनने मिलती थी। मगर जिस तरह से 60 फीसद मानव शक्ति निठल्ली बैठ अपनी आशा-आकांक्षाओं के लिए सक्षम होने के बावजूद काम के लिए मातम मनाती घूम रही है। इसे देखकर, सुनकर दर्द भी होता है और दुख भी। मगर यक्ष सवाल यहीं है कि आखिर लोग करे तो क्या करें। आखिर ऐसा कौन समझदार, सक्षम व्यक्ति है। जिसके पीछे ये कारवां सृजन के लिए चल पड़े। 
मगर दुर्भाग्य कि आज अपने-अपने अहम, अहंकार के आगे न तो कोई कुछ सुनना, समझना चाहता है और न ही कुछ करना। हालात कुछ ऐसे है कि कुछ जिन्दा रहने की मजबूरी व अपने अपनो के सपने के लालच में कुछ करना, बोलना नहीं चाहते। कुछ ऐसे है जो सत्ता, सरकार, स्वार्थियों के रहमोकरम करना चाहते है। अब सवाल फिर कि इस कौम के लिए कर कौन। जब तथाकथित सत्ता, संस्थायें समाज सेवक अघोषित रूप से एक हो स्वयं स्वार्थ सिद्ध कर स्वयं के जीवन को सार्थक ही नहीं सुविधा युक्त ऐश्वर्यवान बनाने पर तुले हो। ऐसे में पर्यावरण प्रबन्धक और परिणामों पर विचार कौन करें।
ऐसे में सबसे बड़ी जबावदेही उस नागरिक की है जो स्वयं स्वार्थो में डूब अपना ही नहीं आने वाली पीढ़ी का भी जीवन खराब कर रहे है। इसीलिए वक्त का तकाजा है। जागो मेरे महान मतदाता आखिर कब जागोगे। आज जब चुनाव का वक्त है और लोग वोट मांगने निकल चुके है जो कभी संबंध तो कभी जाति, धर्म, क्षेत्र, विचार इत्यादि को भी चुनाव जीतने भुनाने से नहीं चूकेगें, तो कुछ एहसान जताने से नहीं चूकेगें और ऐन-केन प्राकरेण चुनाव जीत सत्ता तक पहुंच जाएंगें। फिर उस मानव को क्या मिला, उस जवानी को क्या मिला, जो राष्ट्र व मानव कल्याण में अपनी अहम भूमिका साबित कर सकती है। बेहतर हो कि वोट देने से पहले पूर्ण विचार कर ही वोट दें और अपने वोट का उपयोग लोकतंत्र को मजबूत बनाने अवश्य करें।
जय स्वराज

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