वचन, घोषणाओं के भंवर में वोटर डेढ़ लाख हजार करोड़ का कर्ज भी नहीं बना सका खुशहाल, समृद्ध प्रदेश वोट कबाड़ू जननायकों के बीच सृजनात्मक, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल और सामर्थ अनुसार रोजगार का मोहताज हुआ प्रदेश
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
चुनाव आते ही जिस तरह से गांव, गली में वोट कबाड़ने जननायकों की फौज कूद पड़ी है और वचन, घोषणा, क्षेत्र, जाति, सेवा कल्याण के नाम जीत सुनिश्चित करने में जुटी है। ऐसे में वचन, घोषाओं के भंवर कलफते वोटर का क्या जो विगत 70 वर्षो से अपने व अपनी आने वाली पीढी की आशा-आकांक्षा पूर्ति व समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए जननायकों को वोट देते आ रहे है और जननायक वोट लेते आ रहे है। मगर 70 वर्ष बाद भी सृजनात्मक सस्ती शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल और सामर्थ अनुसार रोजगार के मोहताज लोग आज भी अपनी आशा-आकांक्षा तथा समृद्ध, खुशहाल जीवन के नाम मातम मनाते नजर आते है। जिस प्रदेश ने विकास, सेवा कल्याण के नाम डेढ़ लाख हजार करोड़ से अधिक का कर्ज ले रखा हो। उस प्रदेश में बढ़ती आत्म हत्यायें, अपराध और समृद्ध, खुशहाल जीवन के लाले इस बात के स्पष्ट परिणाम है कि वोटर से अपनी-अपनी पसंद के जननायक चुनते वक्त अवश्य भूल हुई है। अब जबकि मतदान नजदीक है और भूल-सुधार का मौका भी तो ऐसे में आम वोटर पूरी सोच-समझ ऐसे जननायक ही चुने जो आशा-आकांक्षाओं पर खरे उतर उनका जीवन समृद्ध, खुशहाल बना पाए न कि वचन, घोषणाओं पत्रों के भंवर जाल में फंस फिर ऐसे जननायक न चुन जाए जो न तो आम गांव, गली, गरीब का भला कर सके, न ही इस प्रदेश को समृद्ध खुशहाल बना सकें।
जय स्वराज
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