राष्ट्र, जन-द्रोही सियासत लोकतंत्र को खतरा झूठे भाषण, भ्रामक प्रचार से पटा लोकतंत्र का चुनावी महाकुंभ सामर्थ, पुरूषार्थ की सिद्धता में प्रदर्शन नहीं, परिणाम अहम भ्रामक प्रसार-प्रसार के भंवर में फसी आशा-आकांक्षायें


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जब लोकतंत्र के महाकुंभ में मतदान का समय है। तब आम गांव, गली, गरीब, बुद्धिजीवी, समर्थ, समृद्ध लोगों की समझदारी, जागरूकता ही बचा सकती है। इस महान लोकतंत्र को और आम जन जीव की स्वच्छंता, समृद्धि और खुशहाली को। क्योंकि जिस तरह से झूठे भ्रामक प्रचार-प्रसार, भाषण इत्यादि का तथा-कथित वोट कबाडृु मंडलियांे द्वारा उपयोग कर लोगों के वोट हासिल करने निकली है और ऐन-केन प्राकरेण जनप्रतिनिधि बन स्वयं को लोकतंत्र में आम जन का महामंडलेश्वर सिद्ध करना चाहती है। ऐसे में आम जन मतदाता, वोटर, गांव, गली में निवासरत हर युवा, बुजुर्ग, माता, बहिनों को जागरूक रहने की जरूत है कि कहीं ऐसा न हो, कि कोई स्वयं को लोकतंत्र के महामण्डेलश्वर का पात्र समझ, हमारा वोट हासिल कर, हमारा भाग्य-विधाता अगले 5 वर्ष के लिए न बन जाए। जिनका न तो जन, जीव, कल्याण, राष्ट्र सेवा विकास से कभी दूर-दूर तक का वास्ता रहा न ही, जिनका कोई सार्वजनिक रूप सेवा कल्याण में रहा। कहीं ऐसा न हो कि लोग हमारा बहुमूल्य वोट हासिल कर, खासकर ऐसे लोग जो स्वयं के स्वार्थ सिद्ध कर सेवा कल्याण के नाम सत्ता सुख भोगना चाहते है या सुख भोगते आ रहे है। अगर आज भी मतदान के दौरान हम भाई-भतीजावाद, जाति, क्षेत्र, प्रलोभन, झूठे आश्वासन, भ्रामक प्रचार-प्रसार, हार-जीत के गणित में उलझे रहें और सच्चे और अच्छे जनप्रतिनिधि को चुनने में असफल और अक्षम रहे तो हमारा भविष्य तो अंधकारमय होगा ही बल्कि हमारे बच्चों का जीवन भी संघर्षपूर्ण बन जाएगा। इसलिए 28 नवम्बर को हमें सारे कार्य छोड़कर अच्छे और सच्चे सेवाभावी कल्याणकारी जनप्रतिनिधियों को चुनने मतदान करने अवश्य जाना चाहिए और ऐसे प्रत्याशी जिनके पास जनता को बताने न तो विकास उन्नमुख, सेवाभावी, कल्याणकारी कोई मुद्दे है और न ही जिनका सार्वजनिक जीवन में सेवा कल्याण विकास के नाम आज तक कोई योगदान रहा है। ऐसे प्रतिनिधियों को अवश्य ध्यान में रख मतदान करना चाहिए जिससे कोई गलत व्यक्ति हमारे वोट को हासिल न कर पाए। 
जय स्वराज

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