अहम मुद्दो से मुंह छिपाते सवाल-जबाव लोकतंत्र के महाकुंभ पर दलों का दुसाहस, शर्मनाक


व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब सत्ता सरकार परिषदों के चुनाव सर पर हो और जनप्रतिनिधि बनने प्रत्याशी जनता के दर पर हो, ऐसे में राष्ट्र, राष्ट्रीयता, आम जन, गांव, गली से जुड़े अहम मुद्दों से इतर व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, ऊल-जुलूल बयानबाजी तथा जबाव के बजाए सवाल करने वालो की मंडली ने देश के लगभग 80 करोड़ सस्ते राशन, शिक्षा, स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, की मोहताज आशा-आकांक्षाओं सहित 60 फीसद बेरोजगार युवा तथा 50 फीसद अल्परक्त के शिकार लोगों के भविष्य को दरकिनार कर आज चुनाव के वक्त सारा फोकस जीत हार पर केन्द्रित कर रहे है वह बड़ा ही शर्मनाक भी है, और दर्दनाक भी।
मगर आम मतदाता को सबसे बड़ी समझने वाली बात यह है कि जो प्रत्याशी मुंह में मिश्री डाल, हाथ-जोड़ मुस्करा या पैर छीने के रिकार्ड बनाने में लगे है वह चुनाव जीतने के बाद कैसी सेवा और कैसा कल्याण करेगें यहीं यक्ष अहम सवाल आज सभी के सामने होना चाहिए।
देखने वाली बात तो इस महाकुंभ में यह होगी कि आम मतदाता अपने व अपने बच्चों सहित प्रदेश-देश के समृद्ध, खुशहाल भविष्य के लिए भ्रामक प्रचार प्रलोभन, जाति, क्षेत्र, धर्म को दरकिनार कर कैसे अच्छे, सक्षम, सेवा भावी जनप्रतिनिधि चुन पाते है और यह तभी संभव है कि जब हम अधिक से अधिक मतदान कर इस चुनावी महाकुंभ में अपने मत का योगदान कर इसे सफल बना, एक मजबूत लोकतंत्र बनाने में अपना योगदान दें।
जय स्वराज 

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता