सृजन-समाधान के बजाये, सत्ता, वोट की खातिर, जनधन की बर्बादी, सरल, शान्तिपूर्ण, समृद्ध, खुशहाल जीवन नहीं, अन्नत समस्या, अराजकता के संकेत


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
स्वयं सिद्ध, समर्थ, सार्थक, सफल, परिणाम मूलक सेवा कल्याणकारी, विकास उन्मुख साबित करने में असफल सत्ता, सरकारें जनप्रतिनिधि, सियासी दलों ने स्वयं के स्वार्थ सिद्ध, सफल करने सत्ता पाने, सरकार बनाने जिस तरह से वोट की खातिर आश्वासन, घोषणा, वचन पत्र, धेय, दृष्टि, घोषणा पत्रों के माध्यम से धन, बल, पैसे की दम पर तकनीक प्रचार, बल, बाहुबल के सहारे जो तैयारियां दिख रही है। 2018 के चुनावा में उससे न तो आम वोटर, मतदाता, नागरिक, गांव, गली, गरीब, किसान का जीवन सरल, शान्तिपूर्ण, समृद्ध, सृजनपूर्ण, सार्थक, खुशहाल बनने वाला है, न ही उनके बच्चों को सस्ती निःशुल्क, सृजनपूर्ण समर्थ, शिक्षा मिलने वाली है, न ही पर्याप्त रोजगार के साथ सस्ता शुद्ध पेयजल सेवा भावी सहज, सस्ती, स्वास्थ सेवा। 
अगर चर्चाओं में मौजूद आंकड़ों को ही ले तो 80 करोड़ से अधिक सस्ते राशन वाले देश तथा 60 फीसदी से अधिक रोजगार के मोहताज युवाओं वाली व्यवस्था एवं 50 फीसदी अल्परक्त तथा कुपोषण के शिकार बच्चे, माताऐं है। इतना ही नहीं, अगर म.प्र. में प्रकाशित हो रहे चुनावी विज्ञापन को देखे, तो 2 करोड़ 20 लाख लोग आज संबल जैसी योजना के पात्र है। अर्थात मदद के आकांक्षी है इतना ही नहीं लोगों के जीवन स्तर को उठाने उन्हें मदद करने अन्तेयष्टि, निःशुल्क चिकित्सा, बीमा, प्रसुति सहायता बोनस बीमा तक बांटना पढ़ रहे है। अगर मोटा-मोटा संभावित आंकड़ा पकड़े तो म.प्र. में ही आधे से अधिक आबादी कहीं न कहीं मदद की मोहताज है और पुरूषार्थ कर प्रदेश को समृद्ध, खुशहाल बनाने वाले युवा काम और संसाधनों के मोहताज है। 
ऐसे में जनधन के खजाने से धन, उलीचने की योजनायें वोट तो दिला सकती हैं और किसी को भी सत्ता में पहुंचा सकती है। मगर 2 लाख 15 हजार करोड़ के कर्ज कोे नहीं पटा सकती। अभावग्रस्त लोगों के जीवन को समृद्ध, खुशहाल नहीं बना सकती, न ही किसानों की हुई म.प्र में रिकार्ड आत्महत्या, महिला, बच्चियों के साथ हुई जघन्य हत्या, बलात्कार जैसी घटनाओं को रोक सकती। इसलिए चुनाव के वक्त आम मतदाता को सोच समझकर अच्छे और सच्चे व्यक्ति को वोट देंकर चुनना चाहिए। क्योंकि चुनावों में मिलने वाले आश्वासनों व प्रलोभनों ने न तो कभी किसी का भला किया है और न ही भविष्य में कर सकते है, फिर सरकार, सत्ता जिसकी भी बनी।
जय स्वराज 

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