मिलकर सत्ता की मलाई लूटने वालों से खिन्न, आम मतदाता मुखर मतदाताओं का मिजाज भारी पड़ सकता है, जीत के मुगालतों पर परिणाम होगा अहम मुद्दा
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार
12 दिसम्बर को आने वाले चुनावी परिणामों में हार-जीत जिसकी भी हो, मगर चुनावों में परिणाम ही अहम मुद्दा रहने वाले है। अगर जनचर्चाओं की माने तो आम मतदाता का सर्वाधिक रोष मिलकर सत्ता की मलाई काटने वालों के खिलाफ है और मतदाता की मुखरता का अंदाजा उसके मिजाज को देखकर लगाया जा सकता है। जो जीत का मुगालता पाले बैठे लोगों की नींद उड़ाने तैयार दिखता है।
मतदाताओं के बीच जिस तरह की जागरूकता का संचार इस चुनाव में देखने मिल रहा है शायद इससे पूर्व के चुनावों में देखने मिला हो।परिणामों को मुहर पर उतावली मानसिकता इस बात की गवाह है कि जीत के लिए उतावले लोागों नेे प्रबंध कितने ही उमंदा क्यों न किए गए हो और कितना ही कूटनीतिक षड़यंत्र आम मतदाता को भोला-भाला समझ तैयार किया हो। मगर जनता के मिजाज से साफ है कि वह तमाम पीड़ाऐं भोगने के बाद अब वह यह समझने तैयार है कि उनकी जिन कमजोरियों का लाभ उठा। चुनावों में भाग्य अजमाने वाले लोग अपनी जीत सुनिश्चित मान लेते थे।
कई लोग तो यह कहते नहीं थकते कि जिस राजनीति पर कभी लोकतंत्र पर नाज था मगर आज की राजनीति के चलते जिस तरह से हमारी स्वाभिमानी संस्कृति, सम्मानित जीवन आज की राजनीति और सत्ता के लिए षड़यंत्रों के चलते कलंकित हुई है और इस कलंक को आम मतदाता ही चुनावों में ऐसे लोगों को सबक सिखाकर धो सकता है, जो इसके लिए जिम्मेदार है। जिनके राज और नीतियों के चलते हमारी सृजनपूर्ण शिक्षा, सेवाभावी, स्वास्थ सेवा, नीर जैसे जल से कल-कल करती नदियां लहरों के उफान मारते तालाब और मौसम के अनुसार ठंडा, गर्म जल प्रदाय करने वाले कुंऐ और घर-घर मौजूद तकनीकी शिक्षा जो जीवन निर्वहन के लिए रोजगार में सहायक होती थी। सामाजिक सदभाव और परिवारिक संस्कार ऐसे कि परिवारिक, सामाजिक, मान-सम्मान, औपचारिक, दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, भैया-भाभी के रिश्तों पर हमें नाज और सम्मान था। जो आज वोट की नीति के चलते नष्ट ही नहीं पतभ्रष्ट हो दम तोड़ चुके है।
अगर यो कहें कि एक स्वाभिमानी, स्वच्छंद, सम्मानजनक जीवन केवल लेने-देने पर आ टिका है। निश्चित ही ऐसी स्थिति में वहीं जागरूकता मतदाता, बुद्धिजीवी, स्वाभिमानी, समझदार मतदाता ही अपने गांव, गली, नगर, शहर, देश-प्रदेेश और देश में स्थापित लोकतंत्र को मजबूत, समृद्ध, खुशहाल बना सकता है। वह भी 28 नवम्बर को अपना मतदान किसी सच्चे, अच्छे, सेवाभावी, जनप्रतिनिधि को चुनकर।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार
12 दिसम्बर को आने वाले चुनावी परिणामों में हार-जीत जिसकी भी हो, मगर चुनावों में परिणाम ही अहम मुद्दा रहने वाले है। अगर जनचर्चाओं की माने तो आम मतदाता का सर्वाधिक रोष मिलकर सत्ता की मलाई काटने वालों के खिलाफ है और मतदाता की मुखरता का अंदाजा उसके मिजाज को देखकर लगाया जा सकता है। जो जीत का मुगालता पाले बैठे लोगों की नींद उड़ाने तैयार दिखता है।
मतदाताओं के बीच जिस तरह की जागरूकता का संचार इस चुनाव में देखने मिल रहा है शायद इससे पूर्व के चुनावों में देखने मिला हो।परिणामों को मुहर पर उतावली मानसिकता इस बात की गवाह है कि जीत के लिए उतावले लोागों नेे प्रबंध कितने ही उमंदा क्यों न किए गए हो और कितना ही कूटनीतिक षड़यंत्र आम मतदाता को भोला-भाला समझ तैयार किया हो। मगर जनता के मिजाज से साफ है कि वह तमाम पीड़ाऐं भोगने के बाद अब वह यह समझने तैयार है कि उनकी जिन कमजोरियों का लाभ उठा। चुनावों में भाग्य अजमाने वाले लोग अपनी जीत सुनिश्चित मान लेते थे।
कई लोग तो यह कहते नहीं थकते कि जिस राजनीति पर कभी लोकतंत्र पर नाज था मगर आज की राजनीति के चलते जिस तरह से हमारी स्वाभिमानी संस्कृति, सम्मानित जीवन आज की राजनीति और सत्ता के लिए षड़यंत्रों के चलते कलंकित हुई है और इस कलंक को आम मतदाता ही चुनावों में ऐसे लोगों को सबक सिखाकर धो सकता है, जो इसके लिए जिम्मेदार है। जिनके राज और नीतियों के चलते हमारी सृजनपूर्ण शिक्षा, सेवाभावी, स्वास्थ सेवा, नीर जैसे जल से कल-कल करती नदियां लहरों के उफान मारते तालाब और मौसम के अनुसार ठंडा, गर्म जल प्रदाय करने वाले कुंऐ और घर-घर मौजूद तकनीकी शिक्षा जो जीवन निर्वहन के लिए रोजगार में सहायक होती थी। सामाजिक सदभाव और परिवारिक संस्कार ऐसे कि परिवारिक, सामाजिक, मान-सम्मान, औपचारिक, दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, भैया-भाभी के रिश्तों पर हमें नाज और सम्मान था। जो आज वोट की नीति के चलते नष्ट ही नहीं पतभ्रष्ट हो दम तोड़ चुके है।
अगर यो कहें कि एक स्वाभिमानी, स्वच्छंद, सम्मानजनक जीवन केवल लेने-देने पर आ टिका है। निश्चित ही ऐसी स्थिति में वहीं जागरूकता मतदाता, बुद्धिजीवी, स्वाभिमानी, समझदार मतदाता ही अपने गांव, गली, नगर, शहर, देश-प्रदेेश और देश में स्थापित लोकतंत्र को मजबूत, समृद्ध, खुशहाल बना सकता है। वह भी 28 नवम्बर को अपना मतदान किसी सच्चे, अच्छे, सेवाभावी, जनप्रतिनिधि को चुनकर।
जय स्वराज

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