मार्गदर्शकों की उपेक्षा, पतन के संकेत
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से आजकल इस कलयुग में मार्गदर्शकों की उपेक्षा और स्वार्थवत लोगों का सम्मान का क्रम चल निकला उससे पतन के संकेत स्पष्ट दिखाई पड़ते है। कारण आज की व्यवस्था में स्वार्थवत लोगों का सक्षम, सफल होना इस बात का प्रमाण है कि अच्छे और सच्चे लोग संसाधनों एवं मानव विकास के आभाव में अक्षम, असफल साबित हो रहे है। आज राजनीति, समाज में जिसे सक्षमता, सफलता का तमगा मिल रहा है। निश्चित ही यह क्षणिक मात्र है, पूरा यथार्थ नहीं। जो आने वाले समय में असमर्थ भी होगा और असफल भी। जरूरत समझने की स्वयं स्वार्थ से निकल उस 60 फीसदी मतदाताओं को समझने की है। जो युवा है जिनमें सामर्थ भी है और पुरूषार्थ भी। क्योंकि बच्चे जहां अबोध है और युवा सपनों के सागर में हिचकोले ले रहे है तो बुजुर्ग सहयोग सेवा के मोहताज। ऐसे में स्वयं ही मार्गदर्शित हो, सच्चे, सक्षम प्रत्याशियों का चयन अपने मत के माध्यम से करना आम नागरिक की सार्थकता और सफलता है। जय स्वराज
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