चुनाव आते ही आम जन की पूछ परक बढ़ी
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से आजकल चुनाव में अपना-अपना भाग्य अजमा रहें प्रत्याशी सुबह होते ही वोट मांगने निकल पड़ते है। कोई पैर छूकर, तो कोई मुस्कुराकर, तो कोई नुक्कड़ सभा और जनसंपर्क कर अपना-अपना जनाधार बढ़ाने में लगे है। सभी को अपनी-अपनी सुनिश्चत जीत का भरोसा है, तो आम जन को कई प्रत्याशियों के बदले व्यवहार को देखकर अक्षमभाः हो रहा है। बड़े-बड़े आश्वासन, लंबे चैड़े वादे, सुन-सुन कर जागरूक मतदाता हदप्रद है। मगर जीत का मुगालता पालने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता। बड़े-बड़े विज्ञापन हैलीकाॅप्टरों से सभाऐं और लग्झरी वाहनों में फर्राटे भरते भाग्यविधाताओं के पास शायद 80 करोड़ के लगभग सस्ते राशन के मोहताज, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ सेवा, स्वच्छ पेयजल एवं 60 फीसदी से अधिक रोजगार के मोहताज युवा व 50 फीसदी के आसपास अल्प रक्त के शिकार लोगों के संबंध में न तो किसी के पास कोई समाधान का वादा है और न ही अभी तक सुधार क्यों नहीं हो सका। इस सवाल का जबाव है। जबकि हर एक जनप्रतिनिधि हर हालात में जीतना चाहता है और जीतने के बाद सेवा करना चाहता है। देखना होगा कि 28 नवम्बर मतदान के दिन आम मतदाता वोट मांगने वालों को किसी रूप में लेकर अपना अमूल्य मतदान कर किसके समर्थन में अपना मत जताता है। फिलहाल वोट कबाड़ू, तथाकथित मंडलियां गांव, गली की खांक छानती नहीं थक रहीं।
जय स्वराज
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