दुख, दर्द की लाश पर मलाई काटते दल स्वार्थवत माहौल में कैसे बने सृजन, सेवाभावी, समृद्ध लोकतंत्र
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
किसी भी सशक्त, समृद्ध, सेवाभावी तंत्र में उम्मीद की जाती है कि लोगों की सेवा कल्याण समृद्धि का कार्य सुनिश्चित होगा। मगर जब गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचितों के दुख, दर्द की लाश पर सियासत के सहारे सत्ता का मंत्र सिर्फ जीत हो। ऐसे में कैसे सशक्त, समृद्ध तंत्र स्थापित हो। मगर जब विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को सत्ता चुनने का अपने मत के माध्यम हक हो, ऐसे में हर नागरिक की जबावदेही होती है कि वह स्वयं ही नहीं, अपनी आने वाली पीढ़ी के समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए ऐसे जनप्रतिनिधि सत्ता, सरकारों को चुन, जो उनके सपने पूर्ण कर उनकी आशा-आकांक्षाओं पर खरे उतरे और एक सशक्त समृद्ध लोकतंत्र का मार्ग प्रस्त करें। मगर यह तभी संभव है जब हर एक मतदाता झूठे आश्वासन, लालच, जाति, धर्म, क्षेत्र के भ्रम जाल में न फस एक अच्छे और सच्चे सक्षम प्रत्याशी को चुने। तभी नागरिक की सफलता और सक्षमता इस महान लोकतंत्र के चुनाव के रूप में होने वाले महा यग में मानी जायेगी।
जय स्वराज

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