कठिन नहीं, सत्ता की डगर गुरिल्ला अंदाज में लड़ना होगा रण
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आसन्न 4 राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान जो संदेश साफ है। उसके मद्देनजर काॅग्रेस की रणनीति में बदलाव जरूरी है। क्योंकि आज खासकर 3 राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़, म.प्र. में विरोधी दल जहां संगठन धन, सत्ताबल में मजबूत है। उसके मुकाबले काॅग्रेस उससे कोसो दूर है। ऐसे में काॅग्रेस अपनी रणनीत में बदलाव कर अपने सियासी चाड़क्य व स्वच्छ छवि के चमकदार नेताओं तथा व्यवहारिक तकनीक के साथ सटीक शुरूआत करती है तो परिणाम कुछ भी हो सकते है। मगर यह तभी संभव है जब काॅग्रेस आलाकमान सीधे संज्ञान ले और सीधे कमान संभाल स्वयं को साबित स्थापित करने एक नई शुरूआत करें। जरूरत पढ़े तो नये सहयोगी पदाधिकारी, प्रवक्ता, प्रबंधकों की सीधी नियुक्ति कर, समर में कूद सियासी आगाज करें। जरूरत पड़े तो स्वयं संचार माध्यम उपयोग मात्र 1 घंटे कर 3 राज्यों को जोड़े, जरूरत हो तो दौरे के दौरान उन्हें जुड़ने का आॅफर भी करें। अगर यह रणनीत कामयाब रही तो निश्चित ही काॅग्रेस के लिए यह सोने में सुहागा जैसी स्थिति होगी।
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