असंभव हुई, सत्ता में आम नागरिक की भागीदारी सियासी झूठ, जनधन की लूट को सबक जरूरी मतदाता का वोट ला सकता है प्रदेश में समृद्धि, खुशहाली
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर हम अपना जनप्रतिनिधि चुनने या वोट देते वक्त बगैर झूठ को पहचाने सार्वजनिक संपदा व लोगों के हकों की लूट करने वालों की पहचान किए बिना जाति, धर्म, क्षेत्र या लालच या फिर किसी के कहने समझाने, भाषणों से भ्रमित हो वोट देते है वह भी बगैर सोचे-समझे तो हम स्वयं व अपने बच्चों के साथ अन्याय कर ऐसे लोगों को चुनते है। जिनके आचरण व्यवहार से हम सत्ता की भागीदारी तो गवा ही चुके है। साथ ही अपने व अपनों के समृद्ध, खुशहाल जीवन के मार्ग की भी बड़ी बाधा साबित हो रहे है। जो स्वयं के साथ तो अन्याय है ही साथ ही राष्ट्र, समाज के प्रति बड़ा ऐसा अपराध है जिसका दंश हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़ी भी झेलने मजबूर होगी।
क्योंकि जिस तरह से स्वस्थ लोकतंत्र की सियासत में सेवा कल्याण के नाम झूठ और लूट की संस्कृति पनप रही है। वह खतरनाक ही नहीं बड़ी घातक है। जिस तरह से 80 फीसद सस्ते राशन, स्वस्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, सृजनात्मक शिक्षा, रोजगार के मोहताज लोग है व 50 फीसद अल्प रक्त से ग्रस्त कुपोषित लोग हमारे बीच है। वह किसी भी सभ्य समाज स्वस्थ लोकतंत्र के लिए दर्दनाक व शर्मनाक है। 60 फीसद बेरोजगार युवा शक्ति आज अपने सामर्थ, पुरूषार्थ पर मातम मनाती नहीं थकती। जबकि हमारी युवा पीढ़ी शक्ति में न तो पुरूषार्थ की कोई कमी है, न ही सामर्थ कि अगर कोई खामी है। तो बगैर सोचे समझे लालच, भावुकता बस अपने बहुमूल्य वोट की बर्बादी तथा संसाधन व सटीक नीतियों की जिसका निर्माण निर्धारण चुने हुए जनप्रतिनिधियों के वोट से अस्तित्व में आने वाली सत्ता, परिषद, सरकारंे करती है। आज जब धन, बाहुबल के आगे आम व्यक्ति से सत्ता दूर और झूठ और लूट का सेवा कल्याण के नाम भ्रम जाल बना है। ऐसे में आम नागरिक को अभिमन्यू बन अपने वोट के माध्यम से उस चक्रव्यूह को तोड़ना होगा जो धन, बाहुबल या सत्ता बल के सहारे हमारी आशा-आकाक्षांयें ही नहीं हमारे समृद्ध, खुशहाल जीवन की बाधा और लोकतंत्र के लिए घातक बन गया है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर हम अपना जनप्रतिनिधि चुनने या वोट देते वक्त बगैर झूठ को पहचाने सार्वजनिक संपदा व लोगों के हकों की लूट करने वालों की पहचान किए बिना जाति, धर्म, क्षेत्र या लालच या फिर किसी के कहने समझाने, भाषणों से भ्रमित हो वोट देते है वह भी बगैर सोचे-समझे तो हम स्वयं व अपने बच्चों के साथ अन्याय कर ऐसे लोगों को चुनते है। जिनके आचरण व्यवहार से हम सत्ता की भागीदारी तो गवा ही चुके है। साथ ही अपने व अपनों के समृद्ध, खुशहाल जीवन के मार्ग की भी बड़ी बाधा साबित हो रहे है। जो स्वयं के साथ तो अन्याय है ही साथ ही राष्ट्र, समाज के प्रति बड़ा ऐसा अपराध है जिसका दंश हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़ी भी झेलने मजबूर होगी।क्योंकि जिस तरह से स्वस्थ लोकतंत्र की सियासत में सेवा कल्याण के नाम झूठ और लूट की संस्कृति पनप रही है। वह खतरनाक ही नहीं बड़ी घातक है। जिस तरह से 80 फीसद सस्ते राशन, स्वस्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, सृजनात्मक शिक्षा, रोजगार के मोहताज लोग है व 50 फीसद अल्प रक्त से ग्रस्त कुपोषित लोग हमारे बीच है। वह किसी भी सभ्य समाज स्वस्थ लोकतंत्र के लिए दर्दनाक व शर्मनाक है। 60 फीसद बेरोजगार युवा शक्ति आज अपने सामर्थ, पुरूषार्थ पर मातम मनाती नहीं थकती। जबकि हमारी युवा पीढ़ी शक्ति में न तो पुरूषार्थ की कोई कमी है, न ही सामर्थ कि अगर कोई खामी है। तो बगैर सोचे समझे लालच, भावुकता बस अपने बहुमूल्य वोट की बर्बादी तथा संसाधन व सटीक नीतियों की जिसका निर्माण निर्धारण चुने हुए जनप्रतिनिधियों के वोट से अस्तित्व में आने वाली सत्ता, परिषद, सरकारंे करती है। आज जब धन, बाहुबल के आगे आम व्यक्ति से सत्ता दूर और झूठ और लूट का सेवा कल्याण के नाम भ्रम जाल बना है। ऐसे में आम नागरिक को अभिमन्यू बन अपने वोट के माध्यम से उस चक्रव्यूह को तोड़ना होगा जो धन, बाहुबल या सत्ता बल के सहारे हमारी आशा-आकाक्षांयें ही नहीं हमारे समृद्ध, खुशहाल जीवन की बाधा और लोकतंत्र के लिए घातक बन गया है।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment