अधर में आशा आकांक्षा मुद्दा विहीन मंच वोट लेने-देने तैयार


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर फर्स से लेकर अर्स तक पहुंचने की विरासत को विसार धन के फर्स पर अर्स तक कि पहुंचने की कहावत होते देखना है तो टिकट वितरणों की कला से देखा जा सकता है। मगर आज उन आशा-आकांक्षाओं का क्या होगा। जो वोट देने लेने तैयार मुद्दा विहीन मंच पर मातम मनाने मजबूर है। निश्चित ही विगत 3 दशक में जो दुश्वारियों उन आशा-आकाक्षांओं ने आश्वासन, भाषणों के भरोसे झेली है वह किसी से छिपी नहीं। 
परिणाम सृजन विहीन शिक्षा, सेवा, संसाधन और मानव संसाधनहीन व्यवस्था के साथ रोजगार विहीन व्यवस्था हमारे बीच मौजूद है। कारण कि हम वर्षो से मुद्दा विहीन माहौल में वोट लेने-देने में ही मशगूल है। जो किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कलंक ही कहा जायेगा। जिस तरह से आज की सियासत सियासी दल धन, बल, जीत के मोहताज हो। आशा-आकांक्षाओं को तिलांजली दें। विचार सिद्धान्तों को दरकिनार कर सत्ता हथियाने सत्ता पाने उतावले है। उससे साफ जाहिर है कि 80 फीसदी सस्ते राशन के मोहताज 50 फीसदी अल्परक्त, कुपोषण के शिकार और 60 फीसदी युवा पीढ़ी के सपने आज भी उनके लिए दूर की कोणी है। भले ही आज लोकतंत्र के महाकुंभ का वक्त हो और समृद्ध, खुशहाल जीवन की दरकार। मगर यह तभी संभव है जब हम अपना मत सोच समझ कर अच्छे लोगों को दे पाये।
जय स्वराज

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