भारतीय रेल की अदभुत उपलब्धि एक आदमी के भरोसे हो रहा है, 20 ट्रेनों का संचालन पूर्वी, पश्चिमी, काॅरिडोर पर रेल मंत्रालय की सुश्ती घातक
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
देखा जाए तो पूर्वी, पश्चिमी, रेल काॅरिडोर के अहम भाग से अनभिज्ञ रेल मंत्रालय आज भी लोगों को हताश-निराश किए है। अगर इस भाग की इसी तरह रेल मंत्रालय अनदेखी करता रहा, तो इसका दंश समूचे देश को भोगना पड़े तो कोई अति संयोक्ति न होगी।
देखा जाए तो वर्षो पूर्व, पूर्वी, पश्चिमी छोर को जोड़ने वाला लगभग 250 किलोमीटर का प्रस्तावित रेलमार्ग सवाई माधोपुर से झांसी वाया श्योपुर, शिवपुरी आज भी अपनी शुरूआत होने की आस लगाए बैठा है। कई मर्तवा इस मार्ग को लेकर चुने हुए जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवियों द्वारा रेल मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया। मगर बुलेट ट्रेन दौड़ाने की जिद ने जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अहम मार्ग और पर्यटन एवं खनिज फ्रूट प्रोसेसिंग उघोग से जुड़े इस मार्ग पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। सबसे बड़ी समझने वाली आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जिस शिवपुरी रेल स्टेशन से लगभग 20 रेल गाड़ियां संचालित होती है उस स्टेशन पर समस्त वाणिज्यक सुविधाओं एवं रेल संचालन के लिए मात्र एक आदमी तैनात है। जिसे टिकट वितरण एलाउंस, पूछताछ के साथ लगभग 20 गाड़ियों का संचालन भी करना होता है। हालात ये है कि आये दिन घने जंगलों में टेªन के इंजनों का खराब होना, लोगों का पर्याप्त स्टाफ के अभाव में परेशान होना। इस अहम पर्यटन स्टेशन पर आम बात हो गई है। जिस गुना-इटावा रेल लाईन का विधुतीकरण कार्य वर्षो पूर्व हो जाना था वह आज तक शुरू नहीं हो सका। मगर देश के फायर ब्रान्ड रेल मंत्री बुलेट ट्रेन की चर्चा तो टी.व्ही., डिवेटों पर करते है। मगर इस देश के सबसे अहम रेलमार्ग पूर्वी, पश्चिमी छोर को जोड़ने वाले सवाई माधोपुर से झांसी तक के मार्ग की चर्चा नहीं करते। जो कि रेल विभाग के लिए समझने वाली बात होना चाहिए।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
देखा जाए तो पूर्वी, पश्चिमी, रेल काॅरिडोर के अहम भाग से अनभिज्ञ रेल मंत्रालय आज भी लोगों को हताश-निराश किए है। अगर इस भाग की इसी तरह रेल मंत्रालय अनदेखी करता रहा, तो इसका दंश समूचे देश को भोगना पड़े तो कोई अति संयोक्ति न होगी। देखा जाए तो वर्षो पूर्व, पूर्वी, पश्चिमी छोर को जोड़ने वाला लगभग 250 किलोमीटर का प्रस्तावित रेलमार्ग सवाई माधोपुर से झांसी वाया श्योपुर, शिवपुरी आज भी अपनी शुरूआत होने की आस लगाए बैठा है। कई मर्तवा इस मार्ग को लेकर चुने हुए जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवियों द्वारा रेल मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया। मगर बुलेट ट्रेन दौड़ाने की जिद ने जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अहम मार्ग और पर्यटन एवं खनिज फ्रूट प्रोसेसिंग उघोग से जुड़े इस मार्ग पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। सबसे बड़ी समझने वाली आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जिस शिवपुरी रेल स्टेशन से लगभग 20 रेल गाड़ियां संचालित होती है उस स्टेशन पर समस्त वाणिज्यक सुविधाओं एवं रेल संचालन के लिए मात्र एक आदमी तैनात है। जिसे टिकट वितरण एलाउंस, पूछताछ के साथ लगभग 20 गाड़ियों का संचालन भी करना होता है। हालात ये है कि आये दिन घने जंगलों में टेªन के इंजनों का खराब होना, लोगों का पर्याप्त स्टाफ के अभाव में परेशान होना। इस अहम पर्यटन स्टेशन पर आम बात हो गई है। जिस गुना-इटावा रेल लाईन का विधुतीकरण कार्य वर्षो पूर्व हो जाना था वह आज तक शुरू नहीं हो सका। मगर देश के फायर ब्रान्ड रेल मंत्री बुलेट ट्रेन की चर्चा तो टी.व्ही., डिवेटों पर करते है। मगर इस देश के सबसे अहम रेलमार्ग पूर्वी, पश्चिमी छोर को जोड़ने वाले सवाई माधोपुर से झांसी तक के मार्ग की चर्चा नहीं करते। जो कि रेल विभाग के लिए समझने वाली बात होना चाहिए।
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