जनादेश के रथ की राहुल को कमान
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से देश के 3 हिन्दी भाषी राज्यों की कमान जनाक्रोश के रथ के रूप में राहुल के हाथ लगी है। अब इसे सम्हालना ही राहुल की प्रमाणिकता होगी। क्योंकि जिन 3 राज्यों की जीत ने राहुल को भारतीय राजनीति में स्थापित करने का काम किया है वह हताश-निराश काॅग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो, यह सिद्ध करना राहुल का काम होना चाहिए क्योंकि 2019 कोई दूर नहीं जब देश भर में लोकसभा होना बाकी है।
सबसे अहम चुनौती सत्ता के सही सार्थक संचालन के साथ तेजी से संगठन खड़ा करने के अलावा काॅग्रेस कैम्प में ऐसे लोगों को भी लाने की होगी जो वैचारिक रूप से राष्ट्रवादी व काॅग्रेस के नजदीक है। मगर खेमों में बटे काॅग्रेस के सिपहसालारों की गोलबंदी के चलते काॅग्रेस के बाहर है या चाह कर भी योगदान देने में स्वयं को असफल पाते है।
इसके साथ ही सीधा संवाद ही उन विद्या, विद्ववान आम शुभचिन्तकों से भी कायम करना होगा। जो वादे काॅग्रेस ने जीत से पहले लिए उन पर तेजी से अमल भी 2019 की दिशा तय करेगा। काश राहुल इतना करने में कामयाब रहे तो कोई ताकत नहीं जो काॅग्रेस के अच्छे दिनों के आड़े आए। क्योंकि राहुल जिस जनादेश के रथ पर सवार है। उसका जन्म ही जनाक्रोश के गर्भ से हुआ है। देखना होगा कि राहुल को मिले इस जनादेश का कैसे वह सम्मान कर, सार्थक कर पाते है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से देश के 3 हिन्दी भाषी राज्यों की कमान जनाक्रोश के रथ के रूप में राहुल के हाथ लगी है। अब इसे सम्हालना ही राहुल की प्रमाणिकता होगी। क्योंकि जिन 3 राज्यों की जीत ने राहुल को भारतीय राजनीति में स्थापित करने का काम किया है वह हताश-निराश काॅग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो, यह सिद्ध करना राहुल का काम होना चाहिए क्योंकि 2019 कोई दूर नहीं जब देश भर में लोकसभा होना बाकी है। सबसे अहम चुनौती सत्ता के सही सार्थक संचालन के साथ तेजी से संगठन खड़ा करने के अलावा काॅग्रेस कैम्प में ऐसे लोगों को भी लाने की होगी जो वैचारिक रूप से राष्ट्रवादी व काॅग्रेस के नजदीक है। मगर खेमों में बटे काॅग्रेस के सिपहसालारों की गोलबंदी के चलते काॅग्रेस के बाहर है या चाह कर भी योगदान देने में स्वयं को असफल पाते है।
इसके साथ ही सीधा संवाद ही उन विद्या, विद्ववान आम शुभचिन्तकों से भी कायम करना होगा। जो वादे काॅग्रेस ने जीत से पहले लिए उन पर तेजी से अमल भी 2019 की दिशा तय करेगा। काश राहुल इतना करने में कामयाब रहे तो कोई ताकत नहीं जो काॅग्रेस के अच्छे दिनों के आड़े आए। क्योंकि राहुल जिस जनादेश के रथ पर सवार है। उसका जन्म ही जनाक्रोश के गर्भ से हुआ है। देखना होगा कि राहुल को मिले इस जनादेश का कैसे वह सम्मान कर, सार्थक कर पाते है।
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