मंत्रीमंडल में वर्गीय सन्तुलन अहम जनाक्रोश, आशा, आकांक्षाओं की विसात पर सत्ता सुख हावी
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. मंत्रीमंडल गठन को लेकर जिस तरह से राजस्थान, छत्तीसगढ़ में सियासी सुगवाहट चल रही है कहीं ऐसा न हो कि काॅग्रेस जनाक्रोश, आशा, आकांक्षाओं की विसात पर सत्ता सुख हावी हो जाये या फिर सत्ता में भागीदारी को लेकर वर्ग सन्तुलन बिगड़ जाए। जो 2019 के लिए काॅगे्रस को घातक साबित हो, तो कोई अति संयोक्ति न होगी।
देखा जाए तो म.प्र. में लगभग 33 प्रतिशत ओबीसी, 22 प्रतिशत सामान्य और 21 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एसटी तथा 8 प्रतिशत अल्प संख्यक वर्ग के लोग रहते है।
जिस तरह के अहम अहंकार भरे निर्णयों ने आम आशा-आकांक्षाओं से अनुभूति को पूर्ववत सरकार को दूर रखा और वहीं कारण कहीं वर्तमान सत्ता का सुख सत्ता में भागीदारी को लेकर सरकार पर भारी न पड़ जाए और इसका भी हर्ष 2019 से पूर्ववत सरकार की तरह सरकार का हर्ष न हो जाए। क्योंकि जिस तरह से बगैर किसी आधार भूत ढांचे के ब्लू प्रिंट निर्माण किए बगैर आशा-आकांक्षाओं पर फाॅरी तौर पर मरहम लगाने की जो कोशिश हो रही है उसके सफल सिद्ध होने में कहीं न कहीं सत्ता का अहम, अहंकार स्पष्ट झलकता है। अगर ऐसे में जनाक्रोश को सही समाधान नहीं मिला, तो निश्चित ही 2019 में परिणाम और प्रमाण दोनों ही सत्ताधारी दल अर्थात काॅग्रेस के सामने होंगें।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. मंत्रीमंडल गठन को लेकर जिस तरह से राजस्थान, छत्तीसगढ़ में सियासी सुगवाहट चल रही है कहीं ऐसा न हो कि काॅग्रेस जनाक्रोश, आशा, आकांक्षाओं की विसात पर सत्ता सुख हावी हो जाये या फिर सत्ता में भागीदारी को लेकर वर्ग सन्तुलन बिगड़ जाए। जो 2019 के लिए काॅगे्रस को घातक साबित हो, तो कोई अति संयोक्ति न होगी। देखा जाए तो म.प्र. में लगभग 33 प्रतिशत ओबीसी, 22 प्रतिशत सामान्य और 21 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एसटी तथा 8 प्रतिशत अल्प संख्यक वर्ग के लोग रहते है।
जिस तरह के अहम अहंकार भरे निर्णयों ने आम आशा-आकांक्षाओं से अनुभूति को पूर्ववत सरकार को दूर रखा और वहीं कारण कहीं वर्तमान सत्ता का सुख सत्ता में भागीदारी को लेकर सरकार पर भारी न पड़ जाए और इसका भी हर्ष 2019 से पूर्ववत सरकार की तरह सरकार का हर्ष न हो जाए। क्योंकि जिस तरह से बगैर किसी आधार भूत ढांचे के ब्लू प्रिंट निर्माण किए बगैर आशा-आकांक्षाओं पर फाॅरी तौर पर मरहम लगाने की जो कोशिश हो रही है उसके सफल सिद्ध होने में कहीं न कहीं सत्ता का अहम, अहंकार स्पष्ट झलकता है। अगर ऐसे में जनाक्रोश को सही समाधान नहीं मिला, तो निश्चित ही 2019 में परिणाम और प्रमाण दोनों ही सत्ताधारी दल अर्थात काॅग्रेस के सामने होंगें।
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