जनता की जीत पर सत्ता का बंटवारा बैवस आलाकमान और मलाई लूटने आतुर, सिपहसालार
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. की महान जनता के जनादेश की जीत पर जीत की दावेदारी जो भी करें। मगर हकीकत यह है कि अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता ने सत्ता के आचरण, व्यवहार के मद्देनजर एक मौका ऐसे दल को दिया जिसके माथे पर 15 वर्ष पूर्व अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार का तिरपुंड खींच उसे सत्ता से विदा किया था। मगर दुर्भाग्य कि 15 वर्ष बाद उसे उसी दल के अलावा कोई विकल्प नहीं मिला। बैसे भी जिस विकल्प पर उसकी मुहर लगी। उसका कोई सार्थक प्रयास जीत के लिए मत हासिल करने में नहीं रहा, सिवाए उसके आलाकमान या उनके सार्गिदों के रोड शो और सभाओं मंदिरों में मत्था टेकने के। बहरहाल अल्प मत ही सही, जो सत्ता उसे मिली उसमें जिस दुसाहस भरे अंदाज में सत्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है, उस दुसाहस ने म.प्र. की जनता ही नहीं, आम बुद्धिजीवियों को निराश करने का कार्य किया है।
ये अलग बात है कि म.प्र. के नये मुखिया अपनी सूझ-बूझ का उमदा प्रदर्शन कर जनादेश को जन विश्वास में बदलने की कोशिश में लगे है। मगर सत्ता के लिए जिस तरह का आचरण, व्यवहार इस अल्प मत सरकार व आलाकमान की मजबूरी दिख रही है वह फिलहाल समूचे प्रदेश में चर्चा का विषय है। जो नवगठित सरकार के लिए न तो शुभसंकेत कहे जा सकते है, न ही गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचितों के लिए। देखना होगा कि जिस सूझ-बूझ के साथ मुखिया एक नये अंदाज में लम्बी लकीर दर व दर खींचने लगे है क्या वह समृद्ध, खुशहाल प्रदेश का खांका खींचने में कामयाब हो पाते है। यहीं अल्प मत सरकार को समझने वाली बात होना चाहिए।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. की महान जनता के जनादेश की जीत पर जीत की दावेदारी जो भी करें। मगर हकीकत यह है कि अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता ने सत्ता के आचरण, व्यवहार के मद्देनजर एक मौका ऐसे दल को दिया जिसके माथे पर 15 वर्ष पूर्व अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार का तिरपुंड खींच उसे सत्ता से विदा किया था। मगर दुर्भाग्य कि 15 वर्ष बाद उसे उसी दल के अलावा कोई विकल्प नहीं मिला। बैसे भी जिस विकल्प पर उसकी मुहर लगी। उसका कोई सार्थक प्रयास जीत के लिए मत हासिल करने में नहीं रहा, सिवाए उसके आलाकमान या उनके सार्गिदों के रोड शो और सभाओं मंदिरों में मत्था टेकने के। बहरहाल अल्प मत ही सही, जो सत्ता उसे मिली उसमें जिस दुसाहस भरे अंदाज में सत्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है, उस दुसाहस ने म.प्र. की जनता ही नहीं, आम बुद्धिजीवियों को निराश करने का कार्य किया है।ये अलग बात है कि म.प्र. के नये मुखिया अपनी सूझ-बूझ का उमदा प्रदर्शन कर जनादेश को जन विश्वास में बदलने की कोशिश में लगे है। मगर सत्ता के लिए जिस तरह का आचरण, व्यवहार इस अल्प मत सरकार व आलाकमान की मजबूरी दिख रही है वह फिलहाल समूचे प्रदेश में चर्चा का विषय है। जो नवगठित सरकार के लिए न तो शुभसंकेत कहे जा सकते है, न ही गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचितों के लिए। देखना होगा कि जिस सूझ-बूझ के साथ मुखिया एक नये अंदाज में लम्बी लकीर दर व दर खींचने लगे है क्या वह समृद्ध, खुशहाल प्रदेश का खांका खींचने में कामयाब हो पाते है। यहीं अल्प मत सरकार को समझने वाली बात होना चाहिए।
जय स्वराज
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