किसका होगा राज तिलक, सत्ता या सत्याग्रह में अटका सवाल एक्जिट पोल के आंकड़ों में झूलती जीत-हार

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आशा-आकांक्षा अनुभूति के प्रचंड भंवर से उठी सुनामी किस-किसका सूपड़ा साफ करेगी फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। अगर इस भंवर से उठी सुनामी ने विकराल रूप धारण किया तो बड़ी-बड़ी सियासी इमारतों और वटवृक्ष की तरह जमे दरक जमीदोष नजर आए तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सियासी सैलाब इस मर्तवा साधारण नहीं असाधारण रूप में जान पड़ता है। जिसमें न तो रीति, नीति, प्रबंधन काम आने वाले है, न ही जीत-हार के दावे। 
लंबे समय के इंतजार के बाद 5 राज्यों के संपन्न मतदान पश्चात हार-जीत के अनुमान के आंकड़े जो भी जुगाली करते नजर आते हो। मगर यक्ष सवाल अभी भी जस का तस बना हुआ है कि किसकी होगी जीत और किसकी होगी हार उसका उत्तर शायद 11 दिसम्बर को ही तय होगा। मगर तब तक जनादेश या जनाक्रोश का सवाल उलझा रहना स्वभाविक है तथा सत्ता या सत्याग्रह का उत्तर आना भी बाकी है। इस बीच विलेज टाइम्स की संभावनाओं में जो संकेत मिल पाते है उससे इतना तो तय है कि सत्ता या सत्याग्रह के बीच ही फैसला आने वाला है। अब देखना होगा कि जनादेश और जनाक्रोश के बीच किसका राज तिलक होने वाला है। 
फिलहाल तो बगैर किसी सूचना के आई सियासी सुनामी से सभी सियासी दल सनाके में तो आशा-आकांक्षाऐं हलक में अटकी हुई है।  
जय स्वराज 

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