राजीव, सोनिया की मंशा और त्याग-तपस्या को पलीता लगाती काॅग्रेस सरकार


वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  
जिस मंशा के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत कर अपने ऐतिहासिक निर्णयों के ममाध्यम से अपनी विरासत सोनिया को सौंपी थी। उसे बचाने और आगे बढ़ाने के लिए यूपीए अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शिक्षा सूचना, रोजगार और खादय अधिकार कानून के अलावा भूमिअधिग्रहण कानून बनाकर देश के सामने एक मिशाल प्रस्तुत की। इस बीच जिस तरह से उन्होंने खादय बिल पास कराने के लिए अपनी बीमारी की परवाह न करते हुए बिल के पास हो जाने तक सदन में डटी रहीं। परिणाम खादय बिल तो पास हो गया। मगर सदन से निकलते ही उनकी तबीयत नासाज हो गई और वह मुर्छित हो गईं। 
आज जब तीन प्रदेशों में एक दशक बाद काॅग्रेस की सरकारें लौटी है। ऐसे में सत्ता के लिए मची खींचतान और सरकार में ताकतवर बनने के लिए चल रहे घमासान से इन प्रदेशों में खासकर म.प्र. के आम नागरिक भले ही सांसत में हो। मगर सरकार के कदम हालिया तौर पर स्व.राजीव गांधी तथा श्रीमती सोनिया गांधी की मंशा तथा महात्मा गांधी के बताए रास्तों को पलीता लगाने काफी है। देखना होगा कि नये काॅग्रेस आलाकमान राहुल गांधी म.प्र. सरकार में मचें घमासान को किस रूप में लेते है।  

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