म.प्र. में प्रभावी आबकारी नीति की दरकार राजस्व, रोजगार, मद्यनिषेध अहम
वीरेन्द्र शर्मा
म.प्र. की आबकारी नीति 2019-20 वर्ष के लिए राज्यकीय खजाना भरे जाने को लेकर सरकार की मंशा जो भी हो। मगर लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक का धन कमाकर म.प्र. शासन को मुहैया कराने वाला आबकारी विभाग वर्ष 2019-20 के लिए अभी तक आबकारी नीति घोषित नहीं कर सका। जबकि हर वर्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह में आबकारी नीति घोषित हो जाती थी और 15 जनवरी तक ठेका प्रक्रिया। मगर 30 जनवरी निकल जाने के बाद भी आबकारी नीति की घोषणा का न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है। जबकि म.प्र. की नई सरकार से लोगों को उम्मीद थी कि वह शासन के राजस्व को बढ़ाने के साथ इस मर्तवा लाॅटरी पद्धति के माध्यम से रोजगार के नये अवसर सृजन के साथ मद्यनिषेध के लिए प्रभावी नीति लायेगी। जिससे एक ओर म.प्र. शासन के खाली खजाने को भरा जा सके, तो वहीं दूसरी ओर म.प्र. के बेरोजगारों को लाॅटरी पद्धति के माध्यम से नये रोजगार उपलब्ध हो सके। मगर जिस तरह से आबकारी महकमें ने एक माह का समय निकाल दिया उससे लगता नहीं कि सरकार और आबकारी विभाग राजस्व, रोजगार, मद्यनिषेध को लेकर गंभीर है।
अगर सरकार चाहे, तो अभी भी गत वर्ष की लायसन्स फीस पर 15-20 या 25 फीसदी लायसन्स फीस/डियूटी बढ़ाकर लाॅटरी पद्धति के माध्यम से खाली खजानें के लिए बड़े पैमाने पर राजस्व और लगभग 20 हजार बेरोजगारों को औपचारिक, अनौपचारिक तौर पर रोजगार मुहैया करा सकती है। देखना होगा कि कमलनाथ सरकार क्या निर्णय ले पाती है।
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