अघोषित खाद्य माफियाओं की गिरफ्त में पोषण, भोजन और खाद्य

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
विगत 15 वर्षो में जिस तरह से अघोषित माफिया मंशा अनुरूप गरीब के सस्ते राशन, तेल, बच्चों के पोषण आहार, मध्यान भोजन पर प्रभावी हुआ है। उसने शासन की मंशा को तो पलीता लगाया ही, साथ ही मानवता को भी तार-तार करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। 
अरबों-खरबों की राशि खर्चने के बावजूद सस्ते राशन को भटकते गांव, गली के गरीब, पोषण आहार, मध्यान भोजन से वंचित अल्प रक्त कुपोषण के शिकार बच्चे इस बात का प्रमाण है कि इन क्षेत्रों में सेवाभावी, समितियों के माध्यम से पैर जमा चुका माफियाराज किस कदर हावी है। अगर म.प्र. के ग्वालियर-चम्बल, शिवपुरी, श्योपुर के आंकड़े टटोले जाए और विगत वर्षो में सामने आए घटनाक्रमों पर संज्ञान लिया जाए, तो सारा सच सामने हो सकता है। मगर 15 वर्षो की बिगड़ी व्यवस्था पर म.प्र. सरकार के मुखिया कमलनाथ कब संज्ञान ले, इस अहम व्यवस्था को सु-व्यवस्थित करेगें यह सोचने वाली बात होगी।

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