लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रबल रक्षक थी राजमाता विजयाराजे सिंधिया
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज उनकी पुण्यतिथि ही नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर स्वयं को लोकमाता के रूप में स्थापित करने वाली उस महान मातृशक्ति के अवसान का दिन है। जिन्होनें राजमाता होते हुए भी लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए राजपाट महल को दरकिनार कर जेल जाने तक से परहेज नहीं किया। अगर यो कहे कि सबसे बड़े प्रभावी राजवंश की महारानी, राजमाता के रूप में उन्होंने स्व. इन्दिरा गांधी से भी लोहा लेने से गुरेज नहीं किया, तो कोई अतिसंयाक्ति न होगी। ऐसी शखसियत का पुण्य स्मरण आज लोकतंत्र में अहम है जो लोगों को समझने वाली बात होनी चाहिए।
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