सत्ता की हनक और सियासी संग्राम से सांसत में लोकतंत्र विरोधियों का दमन सियासत में कोई नई बात नहीं सियासी हनक की शिकार समृद्धि, खुशहाली

व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
एक समय एक विद्यवान आचार्य ने भरी सभा में कहा था कि अपनो के हाथों सम्मानित होने में प्रसन्नता होती है। मगर गर्व और गौरव की बात तो तब होगी जब यह राष्ट्र गौरान्वित होगा और यह राष्ट्र समृद्ध, खुशहाल होगा। 
मगर यह तभी संभव है जब व्यक्ति से व्यक्ति परिवार से परिवार और समाज से समाज को मिलाकर इन्हें एक सूत्र में पिरो लोगों के बीच राष्ट्रीय भाव जाग्रत करना होगा और यह कार्य शिक्षक बखूवी रूप से कर सकते है। यह सच है कि हम शस्त्र से पहले शास्त्र से पराजित हुए है जिसके चलते हमें कई मर्तवा अपमानित भी होना पड़ा है। अगर राष्ट्र-जन गांव, गली, पीड़ित, वंचित उपेक्षितों की खातिर हमें सत्ताओं से भी संघर्ष करना पड़े तो हमें अपने बुद्धि कौशल, शिक्षा से पीछे नहीं हटना चाहिए। यहीं विद्या, विद्ववान, शिक्षकों का राजधर्म है। जिस व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र में स्वार्थवत लोग और सत्तायें रहती है उनकी पहचान अस्तित्व आधार कभी खतरों से और संघर्षो से मुक्त नहीं रह सकते।

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