संयम, सृष्टि ही नहीं, खुशहाल जीवन का नैसर्गिक गुण है
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
संयमित जीवन, जीव-जगत ही नहीं, मानव जगत के सफल, सक्षम, समृद्ध, खुशहाल जीवन का आधार भी है। संतुलित संयममित जीवन सृष्टि की सुन्दर कृति है। उक्त उदगार स्वराज के मुख्य संयोजक एवं विलेज टाइम्स संपादक, प्रेस क्लब अध्यक्ष व्ही.एस.भुल्ले ने शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित मद्य संयम कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जो लोग अपने कत्र्तव्यों के प्रति सजग रह अनुशासित जीवन जीते है। उनका जीवन सिर्फ खुशहाल, समृद्ध ही नहीं वह सफल, सक्षम होने के साथ सार्थक भी होता है। इस मौके पर काॅलेज प्राचार्य विद्धवान, वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखे तथा छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर कार्यक्रम के आयोजक आबकारी विभाग के अधिकारियों सहित विभाग के कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राऐं मौजूद थे। कार्यक्रम को सहायक आबकारी अधिकारी श्री राकेश सिंह राड़ा, व्ही.एल दांगी, उपनिरीक्षक संदीप कुमार लुहानी, अशोक कुमार शर्मा, काॅलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर महेन्द्र जाटव, प्रोफेसर दिग्विजय सिकरवार, रामजीदास राठौर, छात्रा अर्सी जैन, छात्र अनिल धाकड़, जितेन्द्र सैन, जितेन्द्र पवैया ने भी अपने-अपने विचार रखे।
संयमित जीवन, जीव-जगत ही नहीं, मानव जगत के सफल, सक्षम, समृद्ध, खुशहाल जीवन का आधार भी है। संतुलित संयममित जीवन सृष्टि की सुन्दर कृति है। उक्त उदगार स्वराज के मुख्य संयोजक एवं विलेज टाइम्स संपादक, प्रेस क्लब अध्यक्ष व्ही.एस.भुल्ले ने शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित मद्य संयम कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जो लोग अपने कत्र्तव्यों के प्रति सजग रह अनुशासित जीवन जीते है। उनका जीवन सिर्फ खुशहाल, समृद्ध ही नहीं वह सफल, सक्षम होने के साथ सार्थक भी होता है। इस मौके पर काॅलेज प्राचार्य विद्धवान, वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखे तथा छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर कार्यक्रम के आयोजक आबकारी विभाग के अधिकारियों सहित विभाग के कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राऐं मौजूद थे। कार्यक्रम को सहायक आबकारी अधिकारी श्री राकेश सिंह राड़ा, व्ही.एल दांगी, उपनिरीक्षक संदीप कुमार लुहानी, अशोक कुमार शर्मा, काॅलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर महेन्द्र जाटव, प्रोफेसर दिग्विजय सिकरवार, रामजीदास राठौर, छात्रा अर्सी जैन, छात्र अनिल धाकड़, जितेन्द्र सैन, जितेन्द्र पवैया ने भी अपने-अपने विचार रखे।
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