राष्ट्र में विद्या, विद्यवान, संपदा, संसाधनों की कमी नहीं, जरूरत उनके संरक्षण सम्वर्धन की है गौवंश से श्राफित भू-भाग कैसे बने समृद्ध, खुशहाल

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  
सत्ताओं के संघर्ष में अनुपयोगी घोषित मुद्दे को लेकर गौवंश का दर्द यह है जो वह व्यक्त नहीं कर सकता कि उसके जीवोत्पार्जन सहित रहने का स्थान कहां। नव संस्कृति में डूबे अर्थ मंत्र की गुलाम वर्तमान मानव सभ्यता आज धन, लालसा में इस महान वंश की उपेक्षा कर, अपनी ही पीढ़ी के लिए खड्डे खोदने में जुटी है। 
परिणाम कि 38-40 कमर और 56-42 के सीने वाली नस्ल का आकार अब 26-28, 34-36 पर सिमट गया है, क्या यहीं हमारी हकीकत और सस्ंकारिक सच है। 

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