लोकतंत्र की सुन्दरता पर सवाल, शर्मनाक
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
हालिया मसला ग्वालियर में आयोजित गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री का संदेश वाचन को लेकर चर्चा में है। जिसमें मंत्री महोदय कुछ लाइन पढ़कर कलेक्टर को शेष वाचन करने कहती दिखी। निश्चित ही इसमें ऐसा कुछ नया नहीं था क्योंकि जिस तरह कई मर्तवा मंत्री पद की शपथ के दौरान शपथ दिलाने वाले अतिथि द्वारा एक लाइन पढ़कर शेष वाचन के लिए शपथकर्ताओं को कह दिया जाता है तो इसमें नया क्या। मगर एक सीधी-साधी महिला जो तीन बार की लगातार चुनी हुई लोकप्रिय विधायक है और इस मर्तवा भी उनके क्षेत्र की जनता ने उन्हें 55 हजार से अधिक ऐतिहासिक मतों से जिताकर विधानसभा भेजा है तथा कमलनाथ सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्री का प्रभार सौंपा है। ऐसी लोकप्रिय नेता के लिए हास्यपद बताना लोकतंत्र की सुन्दरता पर सवाल खड़े करता है। बैसे भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबकुछ विधि सम्वत और उल्लेखित है तो फिर किसी के समर्थन या आर्शीवाद पर सवाल उठाना जिसे स्वयं हमारा महान संविधान संरक्षित करता हो, उस पर हास्यपद, टीका-टिप्पणी शर्मनाक ही कहा जायेगा।
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