कब जागेगा देश, व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
गिरोहबन्द संस्कृति में तब्दील होता हमारा महान लोकतंत्र और तथाकथित दलीय प्रथा, इस महान संस्कारिक सभ्य सुसंस्कृत, शिक्षित कौम के नाम से जाने वाले राष्ट्र को कहा ले जाकर छोड़ेगी कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। मगर संभावनाओं का क्या जो यक्ष बन आज भी यह यक्ष सवाल करते नहीं थकतीं कि जिस राष्ट्र की 65 फीसदी मानव ऊर्जा सृजन के नाम बैवस हो, जिसमें लगभग 33 फीसद ऐसे युवाओं की फौज है जिनके कंधो पर देश की सबा अरब आबादी को दिशा देने का भार हो। ऐसे में 80 करोड़ के करीब सस्ते राशन, 50 फीसद शुद्ध पेयजल, अल्प रक्त, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ सेवाओं के मोहताज हो। 
ऐसे में सृजन, संरक्षण, सम्बर्धन, समस्या समाधान से इतर सत्ता संघर्ष में उलझे सियासी दलों की हकीकत यह है कि जो सेवा कल्याण के नाम अपनी सनातन संस्कृति, सृष्टि के प्राकृतिक सिद्धान्त से इतर हर हाल में सत्ता प्राप्त करना चाहते है। देखना होगा कि जिस पीढ़ी पर हर व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, गर्व और गौरव मेहसूस करता है वह कितनी सार्थक सिद्ध वर्तमान हालातों में हो पाती है। 
जय स्वराज 

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