दुनिया को अपने आध्यात्म, तकनीक, ज्ञान, विज्ञान के सहारे स्वस्थ समृद्ध जीवन का संदेश देने वाला राष्ट्र, शुगर की बीमारी में नम्बर बन, शर्मनाक


विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस राष्ट्र या महान भूभाग पर पग-पग औषधि और डग-डग नीर बहता हो, जहां के आध्यात्म जीवन शैली में समृद्ध, स्वास्थ, शिक्षा, संपदा, प्रतिभाओं का बोल-बाला हो। उस राष्ट्र में मधुमेह जैसे रोगियों की संख्या नम्बर 1 पर हो, यह हमारे लिए दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। 
अगर यह किसी सम्प्रभु आजाद राष्ट्र की उपलब्धि है तो इससे बड़ी असफलता, अक्षमता किसी भी महान भूभाग, राष्ट्र, जन की कुछ और हो नहीं सकती। हम कितने ही सक्षम, समर्थ, सेवाभावी, कल्याणकारी, स्वयं को साबित करने की कोशिश क्यों न करें। मगर हकीकत यह है कि हम अपनी पीढ़ी को सम्हालने में अक्षम, असफल साबित हुए है और एक शसक्त, समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बनाने के बजाए धन्धा, व्यापार, धन लालचियों के मंसूबा पूरे करने वालों के लिए कच्चा माल और बाजार के साथ कबाड़ का हब बन चुके है। 
काश इस सच को हम पीड़ित, वंचित, आभावग्रस्त, गांव, गली के गरीब समझ अपने राष्ट्र रतनों का सम्मान कर पाए जो सहज भी है और संभव भी। क्योंकि इस महान राष्ट्र के नवरत्न शुरू से ही विधा, विद्ववान, शिक्षक, सैनिक, मजदूर और किसान रहे है। अगर इनका मान-सम्मान, स्वाभिमान, संस्कृति, संस्कार बचाने में हम सक्षम, सफल साबित हुए तो मानव होने के नाते यह हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी और यहीं हमारी सिद्धता भी होगी। 
जय स्वराज 

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