शिवपुरी में खाद्य और खाद वितरण पर उठे सवाल अमला अधिकारी मदमस्त


विलेज टाइम्स समाचार सेवा।     
म.प्र. शिवपुरी। जिस तरह से खेती किसानी के समय किसनों को खाद के लिए 2-4 होना पड़ा। वहीं दूसरी ओर सस्ते राशन को मोहताज लोगों की हालत खाद्य वितरण को लेकर कुछ कम खराब नहीं रही। 
कारण माफिया अंदाज में एक-एक समिति पर कई राशन की दुकानें तो कहीं कहीं तो, वन समितियां अपना मूल कार्य छोड़ राशन वितरण का मोर्चा सम्हाले हुए है। इससे बड़ी शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि पोहरी विकासखण्ड की ग्राम पंचायत अहेरा में लगभग 50 लोगों को 1 वर्ष से राशन नहीं मिला, तो दूसरी ओर सोसायटियों को खाद मिलने के बावजूद किसानों को बाजार से औने-पौने दाम फसल बचाने खाद खरीदना पड़ा। 
अपुष्ट सूत्रों की माने तो एक दल विशेष के लोगों का सरकार बदल जाने के बावजूद खादय और खाद वितरण जैसे क्षेत्रों में अघोषित कब्जा है। जिन्हें कुछ जिम्मेदार अधिकारियों का खुला सरंक्षण प्राप्त है। दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष है कि किसान सोसायटी से खाद इसलिए नहीं लेना चाहते कि उन्हें कर्ज चुकाना पढ़ेगा। 
तो वहीं सस्ते राशन वितरण व्यवस्था सम्हालने वालों का तर्क है कि सबकुछ आॅन लाइन है। तो गड़बड़ कहां। मगर हकीकत यह है कि खाद भी ब्लैक में बिचने की चर्चा सरगर्म रही। तो सस्ते राशन पर आज भी माफियाराज हावी है। देखना होगा कि नई नवेली कमलनाथ सरकार इस अहम मुद्दे को कैसे लेती है।

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