स्वराज चलायेगा समृद्धि अभियान
धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मानव, जीव-जगत की समृद्धि के संकल्प के साथ, आज स्वराज ने देश के महान सपूतों के साथ महात्मा गांधी को याद किया। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाली उन महान विभूतियों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी को भी याद किया। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी 15 अगस्त पर स्वराज की चर्चा लाल किले की प्राचीर से करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
वैचारिक आधार पर स्वराज की मशाल उठा मानव सहित जीव-जगत की समृद्धि, खुशहाली के लिए प्रयासरत स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने कहा कि जो स्वराज भारतवर्ष ही नहीं समस्त मानव जीव-जगत की आत्मा और सृष्टि की सवोत्तम कृति रही है। जिसे साक्षी मान कभी जिसकी अनुभूति वीर शहीद सरदार भगत सिंह, महात्मा गांधी ने की और उस पर उन्होेंने अपने-अपने विचार भी जनमानस के सामने रखे तथा जिस स्वराज के क्रियान्वयन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी ने संविधान संशोधन किया तथा जिस स्वराज की चर्चा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से की उस स्वराज को मूर्तरूप देना आज स्वराज में आस्था रखने हर उस मानव की जबावदेही और कत्र्तव्य है जो समृद्ध, खुशहाल जीवन चाहता है। मगर संरक्षण, सम्बर्धन के आभाव में यह महान कार्य असंभव है। जिसे वैचारिक आधार पर ही प्राकृतिक सिद्धान्तों के अनुरूप प्राप्त किया जा सकता है। क्यांेकि स्वराज न तो कोई व्यक्ति, संस्था, संगठन है यह तो सिर्फ और सिर्फ स्वराज प्राप्ति का माध्यम है। जिसमें सभी की सहभागिता अपने नित्य कार्यो से बचे समय से संभव है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मानव, जीव-जगत की समृद्धि के संकल्प के साथ, आज स्वराज ने देश के महान सपूतों के साथ महात्मा गांधी को याद किया। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाली उन महान विभूतियों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी को भी याद किया। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी 15 अगस्त पर स्वराज की चर्चा लाल किले की प्राचीर से करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
वैचारिक आधार पर स्वराज की मशाल उठा मानव सहित जीव-जगत की समृद्धि, खुशहाली के लिए प्रयासरत स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने कहा कि जो स्वराज भारतवर्ष ही नहीं समस्त मानव जीव-जगत की आत्मा और सृष्टि की सवोत्तम कृति रही है। जिसे साक्षी मान कभी जिसकी अनुभूति वीर शहीद सरदार भगत सिंह, महात्मा गांधी ने की और उस पर उन्होेंने अपने-अपने विचार भी जनमानस के सामने रखे तथा जिस स्वराज के क्रियान्वयन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी ने संविधान संशोधन किया तथा जिस स्वराज की चर्चा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से की उस स्वराज को मूर्तरूप देना आज स्वराज में आस्था रखने हर उस मानव की जबावदेही और कत्र्तव्य है जो समृद्ध, खुशहाल जीवन चाहता है। मगर संरक्षण, सम्बर्धन के आभाव में यह महान कार्य असंभव है। जिसे वैचारिक आधार पर ही प्राकृतिक सिद्धान्तों के अनुरूप प्राप्त किया जा सकता है। क्यांेकि स्वराज न तो कोई व्यक्ति, संस्था, संगठन है यह तो सिर्फ और सिर्फ स्वराज प्राप्ति का माध्यम है। जिसमें सभी की सहभागिता अपने नित्य कार्यो से बचे समय से संभव है।

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