ऐतिहासिक विकल्प से वंचित राष्ट्र

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
10 फीसदी संवर्णो को मिले आरक्षण के प्रस्ताव पर लोकसभा में पक्ष-विपक्ष की एकता से साबित होता है कि राष्ट्र जनकल्याण समरस्ता सौहार्द के मुद्दें पर देश एक है। क्योंकि 326 सांसदों की उपस्थिति में 323 सांसदों का समर्थन इस बात का प्रमाण है। मगर दुर्भाग्य कि विगत साढ़े 4 वर्षो में जितना काम देश के गांव, गली, गरीब, किसान, युवा, बेरोजगार के कल्याण और विकास के लिए होना था वह नहीं हो सका। अगर प्रधानमंत्री जी चाहते और वह जिस स्वभाव और सार्थकता के लिए जाने जाते है तो वह राष्ट्र को एक बड़ा सृजनात्मक सर्वमान्य विकल्प देने के साथ सरकार का ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड दे सकते थे। 
मगर दलों के दंश, दासता और वैचारिक उन्माद ने ऐसा होने नहीं दिया। बरना आज यह महान राष्ट्र स्वयं पर गर्व भी करता और स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करता तथा गांव, गली का गरीब, पीड़ित, वंचित, किसान, मध्यम आय वाला संघर्षशील इन्सान समृद्धि, खुशहाली का एहसास कर रहा होता। इतना ही नहीं, राष्ट्र के हर कामगार हाथ शिक्षित, अशिक्षित, कुशल, अर्दकुशल मेहनतकस के हाथ भी रोजगार होता और हमारा महान भू-भाग आज सोना उगल रहा होता।
जय स्वराज 

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