गिरोहबन्द सियासत में सिसकता, लोकतंत्र सेवा कल्याण के नाम सत्ता की लूट
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जिस तरह से गिरोहबन्द सियासत में सेवा कल्याण विकास के नाम मची सत्ता की लूट में लोकतंत्र सिसकता नजर आता है। यह आम युवा, बुजुर्ग, मतदाता को समझने वाली बात होना चाहिए और लोकतंत्र की इस र्दुदशा में राष्ट्र रत्न, शिक्षक, विधा, विद्ववानों को संज्ञान ले, अपनी जबावदेही, कत्र्तव्यों का निर्वहन कर उनका पालन करना चाहिए। साथ ही इस महान राष्ट्र की प्रतिभा, आध्यात्म, तकनीक, विज्ञान का उपयोग हमारे बच्चों को अपनी महान विरासत को बचाने अपने-अपने लक्ष्य निर्धारित कर समाधान के रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहिए।
क्योंकि आजकल युवा, इन्टरनेट और रोजगार में उलझे और हमारे मार्गदर्शक अपनी महत्वकांक्षा पूर्ण करने अहम, अहंकार में, तो पालक अपने जीवन की सार्थकता सिद्ध करने में लगे है। ऐसे में सबसे बड़ी जबावदेही आज इस महान राष्ट्र के बच्चों के हाथ है। अगर हमारी महान नस्ल विद्यवान कौम स्वयं की सार्थकता, सफलता सिद्ध करने में सार्थक, सफल हुई तो निश्चित ही नवसंस्कृति और अर्थहीन जीवन का अन्त होना सुनिश्चित है। यहीं हमारी प्रमाणिकता होगी।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
आज जिस तरह से गिरोहबन्द सियासत में सेवा कल्याण विकास के नाम मची सत्ता की लूट में लोकतंत्र सिसकता नजर आता है। यह आम युवा, बुजुर्ग, मतदाता को समझने वाली बात होना चाहिए और लोकतंत्र की इस र्दुदशा में राष्ट्र रत्न, शिक्षक, विधा, विद्ववानों को संज्ञान ले, अपनी जबावदेही, कत्र्तव्यों का निर्वहन कर उनका पालन करना चाहिए। साथ ही इस महान राष्ट्र की प्रतिभा, आध्यात्म, तकनीक, विज्ञान का उपयोग हमारे बच्चों को अपनी महान विरासत को बचाने अपने-अपने लक्ष्य निर्धारित कर समाधान के रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहिए।क्योंकि आजकल युवा, इन्टरनेट और रोजगार में उलझे और हमारे मार्गदर्शक अपनी महत्वकांक्षा पूर्ण करने अहम, अहंकार में, तो पालक अपने जीवन की सार्थकता सिद्ध करने में लगे है। ऐसे में सबसे बड़ी जबावदेही आज इस महान राष्ट्र के बच्चों के हाथ है। अगर हमारी महान नस्ल विद्यवान कौम स्वयं की सार्थकता, सफलता सिद्ध करने में सार्थक, सफल हुई तो निश्चित ही नवसंस्कृति और अर्थहीन जीवन का अन्त होना सुनिश्चित है। यहीं हमारी प्रमाणिकता होगी।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment