आदत और अलाली की भेंट चढ़ता स्वच्छता अभियान, फण्ड को ठिये ठिकाने लगा, फोटो छपवा संस्कृति घातक


वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अस्तित्व में आते ही पतन का रास्ता तय करने वाले शहरों में नवनिर्मित मूत्रालयों का यूं तो उदघाटन के पश्चात ही उनके पतन का रास्ता तय हो जाता है। क्योंकि की मूत्रालय तो बना दिए जाते है। मगर उनके रखरखाव और साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था का सुनिश्चित न होना, आदत और अलाली को साफ करने काफी है। 
जिससे स्पष्ट है कि आज जब स्वच्छ भारत अभियान सरकारों की प्राथमिकता है। ऐसे में जिम्मेदार लोगों, संस्थाओं की उदासीनता, अलाली उनकी आदत समझने काफी है और उस नवनिर्मित संस्कृति जो फण्ड को ठिये-ठिकाने लगा फोटो संस्कृति तक सीमित हो चुकी। सरेयाम जनधन की बरबादी और आम जन के लिए उपलब्ध होने वाली सुविधा की धज्जियां उठाने वालों को समझना होगा कि उनका कत्र्तव्य दायित्व क्या है।

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