बड़ी जिम्मेदारी का समय-राजगोपाल पी.व्ही. संरक्षक एकता परिषद 2 अक्टूबर से जैनेवा पैदल मार्च
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती के अवसर एकता परिषद जैनेवा की और कूच करेगी। 12 देश तथा भारत के म.प्र., छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल होती हुई यात्रा दिल्ली, उत्तराखण्ड से अटारी पहुंचेगी।
उन्हांेने कहा जल, जंगल, जमीन और मानवीय जीवन तथा पर्यावरण के बेहतर प्रबन्धन के सम्बन्ध में यह यात्रा है। 2 मार्च को भोपाल में गोष्ठी तथा 3 मार्च को रैली निकाली जायेगी। जिसमें 25 जुलाई को होने वाली सुनवाई में केन्द्र व राज्य सरकारों से आग्रह है कि वह वन व अपनी पीढ़ी के जीवन खासकर शहरिया, भरिया, वैगा लोगों के जीवन को ध्यान में रख, अपना-अपना पक्ष रखे। जिससे वन अधिनियम 2013 का ठीक से पालन हो सके और उन्हें उनके अधिकार मिल सके। जिससे उन्हें वन विभाग के उत्पीढ़न से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं समूचे एशिया के लिए यह बड़ी जिम्मेदारी का समय है। क्योंकि हमारे वादे, विज्ञान, समाज, अर्थशास्त्र, शिक्षा के क्षेत्र असफल हो रहे है। हमें नये जीवन की प्रमाणिकता खोजनी है और उसे सफल, सक्षम बना सिद्ध करना है। खासकर इस जबावदेही का मध्यम वर्ग को समझने व समझाने की आवश्यकता है। क्योंकि विकास के नाम विकृति किसी के हित में नहीं जिसकी संभावना स्वयं गांधी जी ने भी हिन्द स्वराज में व्यक्त की है।
महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती के अवसर एकता परिषद जैनेवा की और कूच करेगी। 12 देश तथा भारत के म.प्र., छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल होती हुई यात्रा दिल्ली, उत्तराखण्ड से अटारी पहुंचेगी।
उन्हांेने कहा जल, जंगल, जमीन और मानवीय जीवन तथा पर्यावरण के बेहतर प्रबन्धन के सम्बन्ध में यह यात्रा है। 2 मार्च को भोपाल में गोष्ठी तथा 3 मार्च को रैली निकाली जायेगी। जिसमें 25 जुलाई को होने वाली सुनवाई में केन्द्र व राज्य सरकारों से आग्रह है कि वह वन व अपनी पीढ़ी के जीवन खासकर शहरिया, भरिया, वैगा लोगों के जीवन को ध्यान में रख, अपना-अपना पक्ष रखे। जिससे वन अधिनियम 2013 का ठीक से पालन हो सके और उन्हें उनके अधिकार मिल सके। जिससे उन्हें वन विभाग के उत्पीढ़न से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं समूचे एशिया के लिए यह बड़ी जिम्मेदारी का समय है। क्योंकि हमारे वादे, विज्ञान, समाज, अर्थशास्त्र, शिक्षा के क्षेत्र असफल हो रहे है। हमें नये जीवन की प्रमाणिकता खोजनी है और उसे सफल, सक्षम बना सिद्ध करना है। खासकर इस जबावदेही का मध्यम वर्ग को समझने व समझाने की आवश्यकता है। क्योंकि विकास के नाम विकृति किसी के हित में नहीं जिसकी संभावना स्वयं गांधी जी ने भी हिन्द स्वराज में व्यक्त की है।

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