काॅग्रेस का कुटुम्ब और काॅरपोरेट कल्चर 2019 में काॅग्रेस की नैया डुबाने तैयार
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
काॅग्रेस आलाकमान राहुल गांधी अपने अहम सार्थी प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहारे भले ही यूपी फतह करने व काॅग्रेस का जनाधार बढ़ा, काॅग्रेस के लिए दिल्ली का रास्ता साफ करने में जुटे हो। मगर उनकी कड़ी मेहनत से म.प्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान में लंबे अंतराल के बाद मिली सत्ता में आसीन लोग और काॅरपोरेट कल्चर और कुटुम्ब सियासत को परवान चढ़ाने आतुर नेता फिलहाल काॅग्रेस की नैया डुबाने तैयार दिखते है। यह किसी से छिपा नहीं कि वर्तमान हालातों के मद्देनजर जिस तरह से लोकसभा चुनाव 2019 की बाजी पलटी है और राष्ट्र हित की खातिर काॅग्रेस को जिस तरह की शिकस्त सियासी तौर पर दिख रही है उसके बावजूद भी म.प्र. में पैर फैला चुके कुटुम्ब और काॅरपोरेट कल्चर ने काॅग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है। हो सकता है कि राहुल गांधी की संगठन विहीन काॅग्रेस की कमजोरी का लाभ काॅग्रेसी छत्रप संगठन और सत्ता में हिस्सेदारी बांट 2019 का खौंफ दिखा, उठाने में लगे हो। मगर सरकार की जो चाल-डाल और जो संरचना म.प्र. के सामने सिद्ध हो रही है वह कहीं से भी काॅग्रेस के हित में दिखाई नहीं देती है। बेहतर हो कि राहुल गांधी देश के सबसे अहम प्रदेश म.प्र. में कुछ ध्यान और ज्ञान लगाऐं, नहीं तो 2019 में काॅग्रेस की लुटिया डूबते देर नहीं लगेगी। संगठन और सत्ता में कुटुम्ब भाई, भतीजावाद, चैले-चपाटे, चापलूस और दलालों की बढ़ती भरमार से काॅग्रेस के शुभचिन्तक और काॅग्रेस में आस्था रखने वाले तो आज भी इन लोगों की यह दृष्टि और हीन भावना का शिकार बने हुए है। क्योंकि जहां सत्ता में पद क्षेत्रीय नेताओं की अनुशंसा और संगठन में पद जनाधार विहीन लोगों को बट रहे है जिनकी न तो काॅग्रेस में कभी आस्था रही और न ही विश्वास। ऐसे लोगों की बढ़ती फौज और आधार विहीन योजनाओं से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जो काॅग्रेस के लिए घातक सिद्ध होना स्वभाविक है।
जिस तरह की चर्चा म.प्र. के सियासी गलियारों में ही नहीं, आम जन के बीच सरगर्म है कि लोग सहज शिक्षा, चिकित्सा, शुद्ध पेयजल, रोजगार और भ्रष्टाचार रोकने पर सरकार ने, अभी तक भले ही कोई कारगार प्रमाणिक तौर पर कार्य न किया हो और म.प्र. में न तो एक भी उद्योग और न ही एक भी व्यक्ति को रोजगार मिला हो। मगर जिस तरह से सरकार बनते ही तबादला उद्योग पनपा है और नीतियां बन रही है। शायद ऐसे लोगों को पिछली भाजपा सरकार की 15 साल पुरानी सरकार से सींख लेना चाहिए। जो आज अपने ही अहम अहंकार के चलते सत्ता से बाहर है। क्योंकि इस संचार क्रान्ति के दौर में ऐसा नहीं कि गरीब जनता कुछ समझती नहीं है। सोशल मीडिया पर फोटो चमकाने बड़ी-बड़ी बातें करने और तकनीक, धन, बल के सहारे लोगों की तकलीफों का हल और भला होने वाला नहीं। हल तो तभी संभव है जब कुटुम्ब, काॅरपोरेट कल्चर और गिरोहबन्द सियासत से बाहर निकल आम गांव, गली, गरीब के बारे में नीतियां बने जिसका संदेश महात्मा गांधी ने दिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गांव, गली को 73वां, 74वां संविधान संशोधन कर स्थानीय सरकारों को अपने निर्णय स्वयं ले अपने जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने का अधिकार दिया। राहुल के लिए आज यह समझने वाली बात यह होना चाहिए क्योंकि अल्प मत में प्राप्त सत्ता फिलहाल म.प्र. में 5 वर्ष के लिए है। तो वहीं 15 वर्ष सत्ता में रहने वाले सत्ता से बाहर इसलिए आवश्यक है कि तत्काल राहुल गांधी म.प्र. में संज्ञान ले। ऐसे लोगों का मार्ग प्रस्त करें जो काॅग्रेस के साथ इस प्रदेश, देश व गांव, गली, गरीब का भला करना चाहते है। जो काॅग्रेस के भी हित में होगा और राष्ट्र हित में भी और देश के गांव, गली, गरीब, बच्चे, बुजुर्ग तथा बेरोजगारों के हित में होगा।
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