मंच पर कि प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर ने गांधीगिरी, 3 मार्च से शुरू होगा शिवपुरी में आई.सी.यू. केन्द्र , गुरूजनों के हाथों मंच पर सम्मानित होना गर्व की बात नहीं, गुरू को मैं सम्मानित करू यह मेरे लिए गर्व की बात है- प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिला चिकित्सा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जिला अस्पताल पहुंचे प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर ने माल्यार्पण से स्वयं का स्वागत न करा स्वयं के हाथों डाॅक्टरों का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा मंच पर उपस्थित मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी, मेडीकल के डीन, सिविल सर्जन से यह आग्रह किया कि मुझे अभी तारीख चाहिए कि शिवपुरी का आई.सी.यू. कब शुरू होगा। आप तय करें और अभी मुझे तारीख बतायें जिससे मैं लोगों को बता सकूं कि अपनी मालिक जनता और अपने लोकप्रिय नेताओं को कि आई.सी.यू इस तारीख को मेरे महाराज के शहर में शुरू हो जायेगा और भरी सभा में मंच पर चुप खड़े हो गए। लगभग 15 मिनट तक समूचे कार्यक्रम में सनाका-सा खिचा रहा और मंत्री मंच पर मौन खड़े रहे। उसके पश्चात अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि 2 मार्च से आई.सी.यू. शुरू कर दिया जायेगा। इस पर मंत्री ने मौन तोड़ते हुए चिकित्सीय प्रशासन को तीन मार्च तक आई.सी.यू. शुरू करने की बात कही। तत्पश्चात स्व. माधराव सिंधिया महा विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे प्रभारी मंत्री ने मंच पर पुष्प माला ग्रहण न करते हुए कहा कि मेरे लिए गुरूजनों के हाथों पुष्प गुच बतौर मुख्य अतिथि स्वीकारना गर्व की बात नहीं। गर्व की बात तो तब होगी जब मैं बतौर मुख्य अतिथि अपने गुरूजनों को सम्मानित करूं जो संदेश मुझे मेरे माता-पिता ने बचपन से दिया व मेरे प्रिय नेता स्व. माधवराव सिंधिया और वर्तमान सांसद काॅग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया है और परम्परा को बदलते हुए प्रभारी मंत्री ने काॅलेज के प्राचार्य का माल्यार्पण किया। उपस्थित छात्र-छात्राओं को मंत्री प्रघुम्न तोमर ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि इस पृथ्वी पर माता-पिता से बढ़कर और कोई दूसरा परमात्मा नहीं हो सकता। जो हमारे मार्गदर्शन के लिए साक्षी भी है और जीवन्त भी। जो हमारे समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए आवश्यक। सत्ता दल की धमाचैकड़ी से सनाके में लोग
अन्तिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति हताश-निराश
जिस अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की सेवा का दम सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री तथा दल के बड़े-बड़े नेता भरते नहीं थकते और स्वयं को जनता का सेवक बताते नहीं रूकते। आज उसी सत्ताधारी दल के जनाधार विहीन नेताओं की मंच या मंत्रियों के आजू-बाजू धमाचैकड़ी के चलते अन्तिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति हताश-निराश है और मंत्री और बड़े-बड़े नेता वैबस जिन जनाधार विहीन नेताओं की चर्चा हम यहां कर रहे है। उनका अन्तिम लक्ष्य अपने नेताओं के आगे मुंह दिखाई की रस्म कर स्वयं के स्वार्थ सिद्ध कर, प्रशासनिक तंत्र में अपनी धमक जमाना अन्तिम लक्ष्य है। ऐसे नेताओं के आगे क्या मंत्री, क्या विधायक, क्या जिलाध्यक्ष की एक नहीं चल पाती। ऐसे नेताओं की प्रशासनिक तंत्र में धमक के चलते आम जन ही नहीं, समूचा प्रशासनिक तंत्र सनाके में है।
अगर यो कहें कि औकात से अधिक वजन मिलने के चलते ऐसे नेता जनता की दम पर मिली सत्ता को पाकर बौराहे हुए है, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। जिस तरह से स्वयं को क्षेत्रीय सांसद और काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तथा सच्चे जनसेवक सिंधिया के सार्गिद दिखाने की होड़ फिलहाल शासकीय सार्वजनिक मंचों पर मची है वह किसी से छिपी नहीं है। कारण संगठन ही नहीं, सत्ता के कई पदों पर आसीन होने के बाद जो संदेश छोड़ा जा रहा है वह काॅग्रेस के लिए शर्मनाक भी होना चाहिए और दर्दनाक भी। जो उसके लिए भविष्य के लोकसभा चुनाव में खतरनाक भी साबित हो सकता है। ऐसे जनाधार विहीन नेताओं को शायद यह मुगालता है कि उनकी इन हरकतों से काॅग्रेस का या उनके नेताओं का भला होने वाला है तो वह किसी बड़ी गलतफहमी का शिकार है।
अगर उनका मानना यह है कि काॅग्रेस का आधार उन पर निर्भर करता है, तो यह काॅग्रेस को और उनके नेताओं को समझने वाली बात है। देखना होगा कि सरकार और दल के बड़े नेता ऐसे नेताओं की हरकतों को किस प्रकार लेते है।
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